बीते 2 सालों से चर्चा में रहने वाली टीवीएस जेपलिन बाइक को जेपलिन आर नाम से रजिस्टर कराया गया है। जिसके बाद इसकी लॉन्चिंग का रास्ता साफ होता दिख रहा है। कंपनी ने इस बाइक का कॉन्सेप्ट मॉडल ऑटो एक्सपो 2018 में पेश किया था। जेपलिन ने अपने मॉडल और स्पेसिफिकेशन को लेकर खासी सुर्खियां बटोरी थीं। जिसके बाद से ही इसका इंतजार हो रहा है।
ऑटो एक्सपो 2018 में टीवीएस ने जेपलिन को कॉन्सेप्ट बाइक के तौर पर शोकेस किया था। तब इसके नाम के साथ E के इस्तेमाल किया गया था, जिसे अब R से कन्वर्ट करके E हटा दिया गया है। क्रूजर मॉडस वाली ये बाइक कई खूबियों से लैस है।
टीवीएस की ये पहली ऐसी बाइक है जिसमें 220cc के पेट्रोल इंजन के साथ इलेक्ट्रिक मोटर भी दी है। बाइक में 1200 वॉट की रिजनरेटिव असिस्ट मोटर दी है, जो 48 वोल्ट की लीथियम आयन बैटरी के साथ आती है। ये इतनी पावरफुल है कि 20% तक ज्यादा टॉर्क जनरेट करती है। इसकी टॉप स्पीड 130kph है।
दूसरी तरफ, इसमें 220cc का सिंगल-सिलेंडर पेट्रोल इंजन दिया है, जो 20hp पर 8,500rpm पावर और 18.5Nm पर 7,000rpm टॉर्क जनरेट करता है। ऐसा माना जा रहा है कि इसमें 6-स्पीड गियरबॉक्स मिलेगा। बाइक में USD फॉर्क मिलेंगे।
जेपलिन के डिजाइन की बात करें तो इसमें रोबोट के फेस के जैसी LED हेडलैम्प दी है। ये फ्रंट से फ्लैट और काफी चौड़ी है। इसमें हैलोजन की तरह दिखने वाली लाइट लगी हुई है।
बाइक में दमदार अलॉय व्हील के साथ ट्यूबलेस टायर मिलेंगे। इसमें 110/70 R17 फ्रंट टायर और 140/70 R15 रियर टायर मिलेगा। बाइक का व्हीलबेस 1,490mm है। इसमें डुअल चैनल ABS मिलेगा।
कंपनी ने इस बाइक में बायो नाम का स्मार्ट एक्सेस स्विच भी दिया है। हालांकि, ये काम कैसे करेगा इसे बारे में कोई जानकारी नहीं है। बाइक में एक्शन कैमरा, क्लाउड कनेक्टिविटी वाला इन्फोटेनमेंट स्पीडोमीटर भी मिलेगा।
बाइक की कीमत को लेकर अलग-अलग रिपोर्ट्स आई हैं। कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसकी कीमत 1.20 लाख से 1.80 रुपए तक हो सकती है। वहीं कुछ के मुताबिक, कीमत 2 लाख से 3.2 लाख तक हो सकती है।
मोटोरोला के सब-ब्रांड बीनाटोन ने भारतीय बाजार में ट्रू वायरलेस ईयरबड्स और नेकबैंड लॉन्च किए हैं। कंपनी ने वर्व बड्स 100 और नेकबैंड स्टाइल वर्व रैप 105 और वर्व लूप 105 लॉन्च किए हैं। मोटोरोला की वर्व ऑडियो सीरीज को IPX5 वाटर रेजिस्टेंस रेटिंग दी गई है।
वर्व बड्स 100 चार्जिंग केस 17 घंटे की बैटरी लाइफ के साथ आता है। वहीं, वर्व रैप 105 और वर्व लूप 105 को लेकर कंपनी का दावा है कि ये 8 घंटे का बैटरी बैकअप देंगे। खास बात है कि ये गूगल असिस्टेंट और एपल सीरी के साथ अमेजन एलेक्सा को भी सपोर्ट करते हैं।
वर्व बड्स और नेकबैंक की कीमत
वर्व बड्स 100 ट्रू वायरलेस हेडफोन की कीमत 2,699 रुपए तय की गई है। इसकी बिक्री 10 नवंबर को अमेजन पर की जाएगी। वहीं, वर्व रैप 105 की कीमत 1,699 रुपए और वर्व लूप 105 की कीमत 1,299 रुपए तय की गई है। इन दोनों नेकबैंड को भी अमेजन से खरीद पाएंगे। कंपनी ने इनकी सेलिंग शुरू कर दी है।
मोटोरोला वर्व बड्स 100 के स्पेसिफिकेशन
इस बड्स को लेकर कंपनी का दावा है कि इसका चार्जिंग केस 17 घंटे का बैटरी बैकअप देता है। यानी वर्व बड्स जब डिस्चार्ज हो जाएंगे तब उन्हें केस की मदद से 14 घंटे तक के लिए बार-बार चार्ज कर पाएंगे। इसके साथ तीन अलग तरह के ईयरबड जेल मिलते हैं जिन्हें यूजर्स अपने कानों के हिसाब से इस्तेमाल कर पाएंगे। इसमें मल्टी फंक्शन टच बटन मिलेगा, जिससे कॉल, वॉल्यूम, सॉन्ग चेंज, वॉइस असिस्टेंट जैसे फीचर्स का इस्तेमाल कर पाएंगे।
वर्व रैप 105 के स्पेसिफिकेशन
ये फ्लैक्सिबल नेकबैंड है जिसमें 15mm स्पीकर ड्राइवर दिया है। कंपनी का दावा है कि ये 8 घंटे के बैटरी बैकअप के साथ आता है। हैंड्स-फ्री कॉलिंग के लिए इसमें बिल्ट-इन माइक दिया है। म्यूजिक एक्सपीरियंस को बेहतर बनाने के लिए इसमें एक्स्ट्रा बास दिया है। केबल मैनजेमेंट के लिए दूसरे नेकबैंड की तरह इसमें मैग्नेट भी दी हैं।
वर्व लूप 105 के स्पेसिफिकेशन
इस नेकबैंड को स्पोर्ट एक्टिविटी को ध्यान रखकर तैयार किया गया है। इसके लेकर भी कंपनी 8 घंटे के बैटरी बैकअप का दावा कर रही है। इसमें टेंगल-फ्री केबल मैग्नेटिक बड्स के साथ दी हैं। कंपनी का कहना है कि इस स्पोर्ट्स और जिम में बेहतर इस्तेमाल कर पाएंगे। इसमें भी हैंड्स-फ्री कॉलिंग के लिए बिल्ट-इन माइक्रोफोन दिया है।
कंपनी ने मोटो G9 पावर स्मार्टफोन भी लॉन्च किया है। हालांकि, इस स्मार्टफोन को अभी यूरोप में लॉन्च किया गया है। इसमें 6000mAh की बैटरी के साथ 64 मेगापिक्सल प्राइमरी सेंसर वाला ट्रिपल कैमरा दिया है। यूरोप में इसकी कीमत 199 यूरो (करीब 17,400 रुपए) रखी गई है। ये 4GB रैम और 128GB स्टोरेज के सिंगल वैरिएंट में आएगा। फोन में 6.8-इंच पंच होल HD+ IPS डिस्प्ले दिया है। ये एंड्रॉयड 10 ओएस पर काम करता है। फोन 20 वॉट की फास्ट चार्जिंग को सपोर्ट करता है।
वॉट्सऐप ने यूजर्स के लिए नया डिसअपीयरिंग फीचर रोलआउट कर दिया है। बीते कुछ दिनों से इस फीचर की लगातार चर्चा हो रही थी। इस फीचर की खास बात है कि सात दिन के बाद मैसेज ऑटोमैटिक गायब या डिलीट हो जाएंगे। ये फीचर इंडिविजुअल और ग्रुप चैट दोनों पर काम करेगा।
डिसअपीयरिंग फीचर का फायदा
इस फीचर का सबसे बड़ा फायदा ग्रुप चैट के दौरान मिलेगा। जिन ग्रुप में लंबी और लगातार चैट होती है उनमें मैसेज की संख्या भी लगातार बढ़ती रहती है। ग्रुप चैट को यूजर भी डिलीट नहीं करता है। ऐसे में कई बार जब हम चैट डिलीट नहीं करते हैं तब वॉट्सऐप हैंग होने लगता है। ज्यादा मैसेज की मीडिया फाइल की वजह से फोन भी स्लो हो जाता है।
सभी यूजर्स को मिलेगा अपडेट
वॉट्सऐप के इस नए फीचर का अपडेट सभी यूजर्स को धीरे-धीरे मिलेगा। कंपनी ने इसे सभी के लिए रोलआउट किया है। इसके आप गूगल प्ले स्टोर पर जाकर वॉट्सऐप का अपडेट चेक करते रहें।
कार ड्राइविंग में ब्लाइंड स्पॉट हमेशा खतरनाक साबित होते हैं। ये ऐसे स्पॉट होते हैं जो दिखाई नहीं देते और ड्राइवर हमेशा अंदाजन यहां से गाड़ी निकालता है। हालांकि, ऐसे स्पॉट को दूर करने के लिए बाजार में कई तरह के डिवाइस और गैजेट्स आ रहे हैं। हम आपको ऐसे ही एक डिवाइस के बारे में बता रहे हैं। वैसे, इन दिनों ज्यादातर कार कंपनियां ब्लाइंड स्टॉप को डिटेक्ट करने वाला फीचर भी दे रही हैं।
क्या है ब्लाइंड स्पॉट?
ब्लाइंड स्पॉट का सीधा मतलब है कि कार के आसपास का ऐसा हिस्सा जो ड्राइविंग के दौरान नजर नहीं आता है। जैसे, साइड मिरर में हम कार के बैक साइज को सेट तो कर लेते हैं, लेकिन बैक भी पूरा नजर नहीं आता। यानी कार के टायर नहीं आते। ठीक इसी तरह कार के फ्रंट का टायर भी हमें ड्राइविंग के दौरान नजर नहीं आते। ये भी हिस्से कार के ब्लाइंड स्टॉप कहलाते हैं।
रियर डबल व्यू डिवाइस करेगा मदद
कार के ब्लाइंड स्पॉट को रियर डबल व्यू डिवाइस की मदद से दूर कर सकते हैं। इस डिवाइस में दो मिरर होते हैं जो कार के बैक और फ्रंट टायर के आसपास का पूरा व्यू दिखाते हैं। यानी आपकी कार खड़ी हुई है और उसके आगे या पीछे वाले टायर के पास कोई बैठा है तब आपको वो दिख जाएगा। ठीक इसी तरह कार को बैक करते समय टायर के नीचे कुछ आ रहा है तब वो भी दिख जाएगा।
इस डबल व्यू मिरर डिवाइस के मिरर को आप कार के साइज मिरर की तरह एडजेस्ट कर सकते हैं
इस डिवाइस को कार के साइड मिरर के नीचे की तरफ लगाया जा जाता है जिससे व्यू बेहतर रहे
इन्हें आप बेहतर व्यू के हिसाब से घुमा सकते हैं, वहीं मिरर को भी ऊपर-नीचे कर सकते हैं
इस डिवाइस को आप लेफ्ट या राइट मिरर पर लगाने के लिए अलग-अलग खरीद सकते हैं
यदि आप दोनों साइड मिरर पर ये डिवाइस लगाना चाहते हैं तब कोम्बो भी ले सकते हैं
रियर डबल व्यू डिवाइस की कीमत
ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर इस डिवाइस की कीमत 500 रुपए से शुरू हो जाती है। वहीं, कॉम्बो में इनकी कीमत 650 रुपए के करीब शुरू हो जाती है। मिरर और प्लास्टिक की क्वालिटी के हिसाब से इसकी कीमत ज्यादा हो जाती है। इन्हें सभी तरह की कार के मिरर के ऊपर इस्तेमाल किया जा सकता है।
पैसेंजर कार के निर्माण में गुजरात अब तेजी से देश का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र बनता जा रहा है। सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्यूफैक्चर्स (एसआईएएम) के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2019-20 में भारत में 21.75 लाख पैसेंजर कार का उत्पादन हुआ, जिसमें से 7.10 लाख कारों का उत्पादन गुजरात में ही हुआ। इस तरह देखें तो देश में बनने वाली हरेक तीसरी कार 'मेड इन गुजरात' है। औसतन देखें तो देश में तैयार होने वाली पैसेंजर कारो में लगभग 33% कारों का प्रोडक्शन गुजरात ही करता है। राज्य में फिलहाल चार कंपनियां मारुति सुजुकी, टाटा, फोर्ड और एमजी मोटर्स के कार मैन्युफैक्चरिंग के प्लांट्स हैं। गुजरात सरकार के एक वरिष्ठ आईएएस अफसर ने बताया कि होंडा भी गुजरात में प्लांट बनाने की इच्छुक है और आगामी वर्ष में संभवत: इसका काम शुरू हो जाएगा।
गुजरात में कबसे हुई शुरुआत?
1996 - अमेरिका की ऑटोमोबाइल कंपनी जनरल मोटर्स ने गुजरात के वडोदरा के पास हालोल में प्लांट लगाया।
2010 - तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र् मोदी की सरकार के समय में टाटा मोटर्स ने साणंद में अपनी ड्रीम कार नैनो का प्लांट लगाया। अब इस प्लांट में टिआगो और टिगोर कारों का प्रोडक्शन भी हो रहा है।
2015 - फोर्ड मोटर इंडिया ने साणंद में अपनी कार का प्रोडक्शन शुरू किया।
2017 - सुजुकी मोटर कॉर्पोरेशन ने बलेनो कार का प्रोडक्शन शुरू किया और 2018 से स्विफ्ट गाडियों का प्रोडक्शन भी यहीं हो रहा है।
2017 - बिक्री कम होने और वैश्विक स्तर पर आर्थिक संकट आने पर जनरल मोटर्स ने गुजरात में प्रोडक्शन बंद किया।
2017-18 में चीन की एमजी (मोरिस गैरेज) मोटर ने जनरल मोटर्स का हालोल प्लांट टेकओवर कर अपनी विविध ब्रांड का उत्पादन शुरू किया।
कौन सी कंपनी किस मॉडल की कार बनाती है
टाटा मोटर्स - नैनो, टिआगो और टिगोर
फोर्ड मोटर इंडिया - फीगो और एस्पायर
मारूति सुजुकी - स्विफ्ट और बलेनो
एमजी मोटर - हेक्टर, हेक्टर प्लस
दो वर्ष में इंस्टॉल कैपेसिटी 15 लाख तक पहुंच सकती है
राज्य सरकार के उच्च अधिकारियों के बताए अनुसार गुजरात में कुल मिलाकर 10.90 लाख से अधिक पैसेंजर कार के प्रोडक्शन की क्षमता है। मारुति आने वाले समय में एक दूसरी प्रोडक्शन लाइन इंस्टॉल कर अपना उत्पादन क्षमता में 2.50 लाख कारों की वृद्धि करने जा रही है। इसके अलावा फोर्ड के साथ मिलकर महिंद्रा एंड महिंद्रा भी गुजरात में कार बनाने की योजना पर काम कर रही है। हमारे अनुमान के अनुसार आगामी दो वर्षों में राज्य में कार मैन्युफैक्चरिंग की इंस्टॉल कैपेसिटी 15 लाख तक पहुंच सकती है।
गुजरात में कंपनियों की इंस्टॉल्ड कैपेसिटी
मारुति सुजुकी - 5 लाख
फोर्ड मोटर कंपनी - 2.40 लाख
टाटा मोटर्स - 2.50 लाख
एमजी मोटर - 1 लाख
गुजरात में ऑटोमोबाइल्स के लिए ईको-सिस्टम बना है
राज्य सरकार के उद्योग मंत्रालय के एक उच्च अधिकारी ने बताया कि गुजरात पहले से ही औद्योगिक राज्य रहा है। यहां बड़ी संख्या में ऑटो पार्ट्स का उत्पादन होता है। इसके अलावा स्किल्ड मेनपॉवर उपलब्ध होने के चलते टाटा, मारुति, सुजुकी, फोर्ड जैसी कार बनाने वाली कंपनियों ने यहां प्लांट लगाए हैं। गुजरात में ऑटोमोबाइल्स के लिए ईको-सिस्टम बना है और उसके चलते ऑटो सेक्टर्स की कंपनियां गुजरात की ओर आकर्षित होती हैं।
2010 से अभी तक में कितना निवेश आया?
गुजरात में कार मैन्युफैक्चरिंग को साल 2009 से गति मिली, जब टाटा मोटर्स ने अपनी ड्रीम कार नैनो के प्लांट के लिए पश्चिम बंगाल में जमीन विवाद के बाद गुजरात आने का निर्णय किया। उस समय पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी ने टाटा का सख्त विरोध किया था और उसका फायदा गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने उठाते हुए टाटा को गुजरात आने का न्योता दिया था। गुजरात में 2010 से अभी तक चार कार उत्पादकों द्वारा करीब 13,000 करोड़ो रुपए का निवेश किया जा चुका है।
फोर्ड
5000 करोड़ रुपए
टाटा मोटर्स
4,500 करोड़ रुपए
एमजी मोटर्स
2,250 करोड़ रुपए
मारुति सुजुकी
1,250 करोड़ रुपए
होंडा 1200 करोड़ रुपए का निवेश करेगी
अधिकारियों के बताए अनुसार होंडा का 2-व्हीलर प्लांट गुजरात में हैं। अब कंपनी यहाँ अपना 4-व्हीलर प्लांट भी लगाना चाहती है। इसके लिए सरकार से बात भी चल रही है। होंडा गुजरात में करीब 1200 करोड़ रुपए का निवेश करेगी और कंपनी का नया प्लांट उसके विठ्ठलापुर में स्थित प्लांट के बगल में ही होगा।
बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए अधिक कैपेसिटी के प्लांट बनाए
फोर्ड मोटर इंडिया के स्पोक्सपर्सन कहते हैं कि भारत में हमारी कुल 4.40 लाख वाहनों की उत्पादन क्षमता है, जिसमें से 2.40 लाख कार गुजरात के साणंद स्थित प्लांट में बन सकती हैं। आने वाले समय में बढ़ती मांग को ध्यान में रखकर हमने अधिक उत्पादन क्षमता वाले प्लांट लगाए हैं। इसके अलावा गुजरात में 2.70 लाख इंजन भी बना रहे हैं। पिछले दो वर्षों से ऑटो सेक्टर की स्थिति खराब है और इसका सीधा असर प्रोडक्शन पर हो रहा है। कोविड के बाद बिक्री को जबर्दस्त झटका लगा था। खासतौर पर अप्रैल से जून के बीच हालात बहुत खराब थे। लेकिन अब स्थिति में सुधार आ रहा है तो आशा है कि आगामी वित्तीय वर्ष तक स्थिति में सुधार आ जाएगा।
इलेक्ट्रिक कार का प्रोडक्शन भी गुजरात में हो रहा है
अन्य देशों की तरह भारत सरकार भी इलेक्ट्रिक व्हीकल को प्रोत्साहन दे रही है। देश में फिलहाल टाटा और महिंद्रा जैसी कंपनियां इलेक्ट्रिक कार का उत्पादन कर रही हैं। इसमे टाटा की ई-कार टीगोर उसके साणंद स्थित प्लांट में बन रही है। टाटा मोटर्स के प्रवक्ता ने बताया था कि इलेक्ट्रिक व्हीकल के मामले में टाटा की कारें सबसे ज्यादा बिकती है। वर्तमान में टीगोर और नेक्सन का उत्पादन किया जा रहा है, जिसमें से टीगोर हमारे साणंद के प्लांट में बनती है।
अन्य राज्यों में क्या स्थिति है?
गुजरात में वर्तमान में चार कंपनियों की कारों का प्रोडक्शन हो रहा है। कंपनियों की संख्या के मामले में महाराष्ट्र, गुजरात से आगे है। महाराष्ट्र में टाटा, फिएट, स्कोडा, मर्सिडीज, बेंज, वॉक्सवैगन और जगुआर जैसी कंपनियों के प्लांट्स हैं। इसके अलावा कर्नाटक में टोयोटा, महिंद्रा रेवा ई-कार बनती हैं। तमिलनाडु में बीएमडब्ल्यू, ह्युंडई, महिंद्रा और फोर्ड मोटर्स इंडिया द्वारा कारों का उत्पादन होता है।
भारत में ऑटोमोबाइल सेक्टर में मंदी का साया
देश में बीते सात वर्षों के दौरान पैसेंजर कार का उत्पादन बढ़ा है, लेकिन इनमें से पिछले दो वर्षों में मंदी आने से प्रोडक्शन में कमी आई है। सियाम के आंकड़ों देखें तो पता चलता है कि वर्ष 2013-14 में 23.22 लाख कारों का उत्पादन हुआ था, जो 2016-17 में 27 लाख तक पहुंच गया था। हालांकि, वैश्विक मंदी के चलते कारों की बिक्री में घटोतरी होने से कंपनियों ने प्रोडक्शन में कमी करते हुए 2019-20 में 21.75 लाख कारों का उत्पादन किया था। कोरोना के चलते इस साल भी कारों की बिक्री पर काफी विपरीत असर पड़ा है। इसके चलते 2020-21 में कारों का उत्पादन 20 लाख से भी कम रहने का अनुमान है।
वैश्विक स्तर पर कार उत्पादन में भारत चौथे नंबर पर
कारों के प्रोडक्शन के मामले में वैश्विक स्तर पर भारत की बात की जाए तो देश चौथे नंबर पर आता है। ग्लोबल डेटा एजेंसी स्टेटिस्ट की रिपोर्ट के अनुसार चीन, जापान और जर्मनी के बाद भारत में सबसे ज्यादा कारें बनती हैं। वर्ष 2016 से 2019 के बीच देश में कारों का प्रोडक्शन 16.8% बढ़ा है।