लेनोवो ने भारतीय बाजार में योगा स्लिम 7i को नए प्रीमियम लैपटॉप के तौर पर लॉन्च कर दिया है। यह 10th जनरेशन इंटेल कोर प्रोसेसर से लैस है और इसमें 60Wh की बैटरी दी गई है। कंपनी का कहना है कि इसकी स्क्रीन 180 डिग्री तक खुलती है, साथ ही इसमें लाइटवेट और स्लिम डिजाइन मिलता है। लैपटॉप में डेडिकेटेड जीपीयू ऑप्शन मिलता है और यह लेनोवो के क्यू-कंट्रोल इंटेलीजेंट कूलिंग फीचर के साथ आता है। कंपनी का कहना है कि यह एआई बेस्ड अटेंशन सेसिंग फीचर के साथ आता है जो यूजर को सिंपल टास्क में लगने वाले प्रयासों को बचाता है।
लेनोवो योगा स्लिम 7i: भारत में कीमत और उपलब्धता
लेनोवो योग स्लिम 7i की भारत में कीमत 79,990 रुपए और स्लेट ग्रे कलर ऑप्शन में आता है। यह 20 अगस्त से ऑनलाइन बिक्री के लिए उपलब्ध होगा, जिसे लेनोवो डॉट कॉम समेत अमेजन और फ्लिपकार्ट से खरीदा जा सकेगा। ऑफलाइन रिटेल स्टोर्स पर लेनोवो योग स्लिम 7i की बिक्री शुक्रवार 14 अगस्त से शुरू होगी।
लेनोवो योगा स्लिम 7i: स्पेसिफिकेशन
लेनोवो योगा स्लिम 7i प्री-इंस्टॉल विंडोज 10 के साथ आता है। इसमें 90 प्रतिशत स्क्रीन-टू-बॉडी रेशो के साथ एक फुल-एचडी (1920x1080 पिक्सल रेजॉल्यूशन) आईपीएस डिस्प्ले है, जो 180 डिग्री तक खुलती है। इसमें डॉल्बी विजन सपोर्ट भी है। लैपटॉप 10th जनरेशन इंटेल आइस-लेक कोर i7 सीपीयू से लैस है, जो 10nm आर्किटेक्चर पर आधारित है और 2GB VRAM के साथ Nvidia GeForce MX350 GDDR5 ग्राफिक्स कार्ड के साथ आता है। इसमें 16GB तक LPDDR4X रैम है, जो 3200MHz पर क्लॉक्ड है। स्टोरेज के लिए, लेनोवो योगा स्लिम 7i को 512GB SSD तक से लैस किया जा सकता है।
ऑडियो को इसके इनबिल्ट 4.0W डॉल्बी एटमॉस स्पीकर सिस्टम द्वारा कंट्रोल किया जाता है। कनेक्टिविटी के लिए इसमें 2X2 AX वाई-फाई 6 और थंडरबोल्ट 3 मिलते हैं। यह रैपिड चार्ज प्रो तकनीक के साथ 60Wh की बैटरी के साथ आता है। लेनोवो योग स्लिम 7i का माप 320.6x208x14.9 मिमी और वजन 1.36 किलोग्राम है।
एपल अगले महीने अपने नेक्स्ट जनरेशन आईफोन 12 को लॉन्च कर सकती है। सोशल मीडिया पर फोन से जुड़ी डिटेल भी सामने आती रहती है। हालांकि, इसमें कितनी सच्चाई है इस बात का पता नहीं होता। अब ऐसी खबरें हैं कि नए आईफोन में अमेरिकन बिजनेसमैन एलन मस्क और स्पेसएक्स की थीम मिल सकती है। इस थीम वाले आईफोन 12 की कीमत 3.5 लाख रुपए से भी ज्यादा होगी।
दरअसल, फोन एक्सेसरीज बनाने वाली रूसी की कंपनी कैवियार ने आईफोन 12 के कस्टमाइज्ड डिजाइन 'मस्क बी ऑन मार्श' के प्री-ऑर्डर की बात एक्सेप्ट की है।
दूसरी तरफ, फॉक्स बिजनेस की रिपोर्ट के मुताबिक, स्पेसएक्स थीम वाले आईफोन के लिए ग्राहक को करीब 5,000 डॉलर (लगभग 3.7 लाख रुपए) खर्च करने होंगे। इसमें उन्हें मस्क के सिग्नेचर भी मिलेंगे। बता दें कि कैवियार आईफोन के लग्जरी वर्जन तैयार करती है। जिसमें गोल्ड, डायमंड के साथ दूसरे कीमती मेटल का इस्तेमाल किया जाता है।
बीते साल बनाए थे 99 लग्जरी आईफोन
पिछले साल, इस रूसी लक्जरी ब्रांड ने आईफोन XS और XS मैक्स के 99 लग्जरी मॉडल तैयार किए थे। इनमें से एक की कीमत 8,370 डॉलर (करीब 6,27,000 रुपए) रुपए थी। इन फोन की मैकेनिकल वॉच और डायल में नीलम का इस्तेमाल किया गया था।
इन लग्जरी आईफोन को लेकर कंपनी का कहना है कि वो उन्हें दुनियाभर में फ्री डिलिवरी देती है। साथ ही, कंपनी ईजी रिटर्न और रिफंड की गारंटी भी देती है। इस बार कंपनी का कहना है कि आईफोन में उसे स्पेसएक्स के टुकड़े का इस्तेमाल किया जाएगा, जो अंतरिक्ष में गया था। इससे पहले, कैवियार ने सॉलिड गोल्ड वाले आईफोन 12 की भी घोषणा की थी, जिसकी कीमत 23,000 डॉलर (करीब 17,21,000 रुपए) से भी ज्यादा होगी।
8 सितंबर को लॉन्च हो सकती है आईफोन 12
आईफोन की जानकारी शेयर करने वाले टिपस्टर iHacktu प्रो के ट्वीट में बताया कि, एपल के पास सितंबर और अक्टूबर के लिए दो स्पेशल इवेंट हैं। 8 सितंबर को होने वाले इवेंट में कंपनी अपने मोस्ट अवेटेड नए 5G आईफोन 12 मॉडल को लॉन्च करेगी (लॉन्चिंग के समय इसे कुछ और नाम भी दिया जा सकता है), साथ ही नई एपल वॉच भी लॉन्च करेगी। उनके मुताबकि, एपल एयरपॉवर ( जो कि एक वायरलेस चार्जिंग पैड है) को भी पेश किया जाएगा।
49 हजार रुपए होगी एंट्री-लेवल मॉडल की कीमत
यूट्यूबर जॉन प्रोसर के मुताबिक, आईफोन 12 सीरीज में चार मॉडल लॉन्च किए जाएंगे। इसके एंट्री लेवल आईफोन 12 की कीमत 49,000 रुपए होगी, इसमें 5.4 इंच का OLED डिस्प्ले और डुअल रियर कैमरा सेटअप मिलेगा। इन्होंने पहले भी आईफोन SE 2020 की बारे में जानकारियां लीक की थीं, जो सही निकली। जॉन का कहना है कि यह अफॉर्डेबल फोन होगा जिसमें 5G सपोर्ट मिलेगा।
इन दिनों फोन एक्टिविटी शेयरिंग ऐप या स्क्रीन शेयरिंग ऐप काफी पॉपुलर हो रही है। प्ले स्टोर पर ऐसी कई ऐप्स मौजूद हैं, इन ऐप्स के जरिए कुछ ही सेकंड में किसी भी फोन के स्क्रीन कंट्रोल्स अन्य फोन पर लिए जा सकते हैं। कुछ लोग इन्हें दूसरों की मदद के लिए इस्तेमाल करते हैं तो कुछ दूसरों की निगरानी के लिए इन्हें यूज करते हैं, आइए बात करते हैं कौन-कौन सी स्क्रीन शेयरिंग ऐप प्लेस स्टोर पर मौजूद हैं, ये कैसे काम करती है और क्या हैं इनके फायदे और नुकसान....
क्या होती है स्क्रीन शेयरिंग, कैसे काम करती है?
स्क्रीन शेयरिंग का मतलब एक डिवाइस की स्क्रीन और कंट्रोल्स को दूसरे डिवाइस पर पहुंचाना। यह फोन-टू-फोन, फोन-टू-टीवी और फोन-टू-कम्प्यूटर भी हो सकती है।
स्क्रीन शेयरिंग ऐप्स ज्यादातर फोन, टैबलेट पर काम करती है, कुछ पीसी में भी काम करती हैं। इसे इस्तेमाल करने के लिए सबसे पहले दोनों (शेयर किए जाने वाले और एक्सेस करने वाले) डिवाइस में इन ऐप्स इंस्टॉल करना होता है। जिसे डिवाइस को कंट्रोल करना है उसे विक्टिम डिवाइस भी कहा जाता है। विक्टिम डिवाइस में ऐप इंस्टॉल करने पर यह कोड या पासवर्ड जनरेट करता है, जिसे दूसरे डिवाइस में डालने पर यह आपस में कनेक्ट हो जाते हैं। इस प्रोसेस के पूरा करने के बाद विक्टिम डिवाइस में जो भी एक्टिविटी की जाएगी, वो दूसरे डिवाइस में दिखाई देगा।
1. इंकवायर ऐप (Inkwire)
यह ऐप प्ले स्टोर पर लंबे समय से मौजूद है। कंपनी इसे एंड्ऱॉयड स्क्रीन शेयरिंग और रिमोट असिस्ट ऐप भी कह रही है। यह एंड्ऱॉयड ओएस वर्जन 5.0 और उससे ऊपर के वर्जन में काम करेगी। इसे इस्तेमाल करने के लिए दोनों फोन में ऐप होना जरूरी है। ऐप ओपन करते ही दोनों फोन में शेयर और एक्सेस का ऑप्शन दिखाई देगा। शेयर पर क्लिक करते ही एक एक्सेस कोड जनरेट होगा, जिसे दूसरे फोन में डालना होगा। दूसरे फोन में कोड भर कर एक्सेस पर क्लिक करना होगा। ऐसे करने से चंद सेकंड में पहले फोन की गतिविधी दूसरे फोन पर देखी जा सकेगी। इसमें माइक्रोफोन इनेबल करना का ऑप्शन भी मिलता है
इस ऐप को यूज करने के लिए भी दोनों फोन में यह ऐप होना चाहिए। इस्तेमाल करना का तरीका इन ऐप्स में एक जैसा ही होता है। पहले फोन सिर्फ ऐप को ओपन कर होम पेज पर जाना होगा। जबकि विक्टिम फोन में ऐप इंस्टॉल करके मीन्यू ऑप्शन में सेटिंग्स में जाकर Alias और पासवर्ड सेट करने होंगे और इन्हीं, Alias और पासवर्ड को डालना होगा। ऐसा करने से विक्टिम फोन की स्क्रीन दूसरे फोन पर दिखने लगेगी, अब विक्टिम अपने फोन में जो भी एक्टिविटी करेगी, वो आपको अपने फोन में दिखाई देंगी।
3. एयरमिरर ऐप (AirMirror)
यह ऐप भी प्लेस्टोर पर उपलब्ध है और इसे 4.5 स्टार रेटिंग मिली हुई है। यह ऐप थोड़ी अलग है। पहली बताई गई ऐप में जहां दोनों फोन में एक ही ऐप्स इंस्टॉल करना था वहीं एयरमिरर ऐप में दोनों फोन में दो अलग-अलग ऐप्स इंस्टॉल करना होगा। पहले फोन में एयरमिरर ऐप इंस्टॉल करना होगा जबकि विक्टिम फोन में एयरड्रॉय (AirDroid) ऐप इंस्टॉल करना होगा। साइन-अप, साइन-इन प्रोसेस से गुजरने के बाद जब दोनों को ओपन किया जाएगा, तो इनके इंटरफेस में एक-दूसरे के नाम दिखाई देंगे (डिवाइस के नाम)। इसके बाद इसमें कंट्रोल, कैमरा और स्क्रीन मिररिंग का ऑप्शन दिखाई देगा। इनमें से किसी एक ऑप्शन को सिलेक्ट करने के बाद यह आपस में कनेक्ट हो जाएंगी। ऐसे करने से AirMirror ऐप वाले डिवाइस की सारी एक्टिविटी AirDroid ऐप से लैस फोन में दिखाई देंगी।
4. टीमव्यूवर (TeamViewer)
प्लेस्टोर पर इस ऐप को 3.5 स्टार रेटिंग मिली हुई है। इसे इस्तेमाल करना भी आसान है। जिस फोन को कंट्रोल करना है उसमें टीमव्यूवर क्विक सपोर्ट और जिससे कंट्रोल करना है उसमें टीमव्यूवर ऐप इंस्टॉल करना होगा। दोनों ही फोन के इंटरफेस अलग अलग है। टीमव्यूवर क्विक सपोर्ट ऐप को ओपन करने पर एक पार्टनर आईडी जनरेट होगी, जिसे दूसरे फोन की टाइप करना होगा। इसके बाद रिमोट कंट्रोल पर क्लिक करते ही दोनों फोन आपस में कनेक्ट हो जाएंगे। अब टीमव्यूवर क्विक सपोर्ट ऐप से लैस फोन की पूरी स्क्रीन दूसरे फोन से एक्सेस की जा सकेंगी।
5. एपावरमिरर (ApowerMirror)
प्लेस्टोर पर इसे 4 स्टार रेटिंग दी गई है। इसे फोन, टीवी और पीसी तीनों के लिए यूज किया जा सकता है। इसे एंड्रॉयड-टू- एंड्रॉयड/आईओएस डिवाइस या आईओएस-टू-आईओएस डिवाइस को कनेक्ट किया जा सकता है। इसमें स्क्रीन रिकॉर्डर भी इस्तेमाल किया जा सकता, जो स्क्रीन पर की गई सारी एक्टिविटी रिकॉर्ड करेगा साथ ही इसमें किसी भी समय स्क्रीनशॉट भी लिए जा सकते हैं।
दूसरों को फोन देते वक्त सतर्क रहें
कई बार हमारे दोस्त यार हमसे फोन मांग लेते हैं, लेकिन किसी को भी फोन देते वक्त सतर्क रहने की जरूरत है। क्योंकि आपको बिना बताए फोन में स्क्रीन शेयरिंग ऐप इंस्टॉल की जा सकती है, और पर्सनल चैट, बैंकिंग ट्रांजेक्शन और अन्य निजी गतिविधियों की निगरानी की जा सकती है।
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को ऑटो कंपनियों और ग्राहकों को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने मार्च में लॉकडाउन से पहले बेचे गए BS-IV के रजिस्ट्रेशन की अनुमति दे दी है। इस फैसले का फायदा केवल उन वाहनों को मिलेगा, जिनकी जानकारी सरकार के वाहन पोर्टल पर पहले से अपलोड है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से वाहन कंपनियों और वाहन खरीदने वाले ग्राहक दोनों को फायदा होगा, क्योंकि इन वाहनों का रजिस्ट्रेशन नहीं हो पा रहा था।
31 जुलाई को लगा दी थी रोक
सुप्रीम कोर्ट ने 31 जुलाई को इस मामले की सुनवाई करते हुए कहा था कि अगले आदेश तक BS-IV वाहनों का रजिस्ट्रेशन नहीं किया जाए। साथ ही कोर्ट ने मार्च में लॉकडाउन के दौरान बड़ी संख्या में वाहनों की बिक्री पर नाराजगी जताई थी। गुरुवार को जस्टिस अरुण मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान 25 मार्च के बाद बेचे गए वाहनों के रजिस्ट्रेशन की अनुमति नहीं होगी। साथ ही कोर्ट ने कहा कि जिन वाहनों डाटा वाहन पोर्टल पर अपलोड नहीं होगा, उनका भी रजिस्ट्रेशन नहीं हो सकेगा। जस्टिस मिश्रा ने कहा कि हम दिल्ली-एनसीआर में वाहनों के रजिस्ट्रेशन को मंजूरी नहीं दे सकते हैं। यह फैसला दिल्ली-एनसीआर में लागू नहीं होगा।
सख्त लॉकडाउन में बेचे गए ढाई लाख वाहन
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के हवाले के केंद्र सरकार की ओर से पेश किए गए डाटा के मुताबिक, 12 से 31 मार्च के बीच 11 लाख BS-IV वाहन बेचे गए हैं। डाटा के मुताबिक अकेले ढाई लाख वाहन केवल 29 से 31 मार्च के बीच बेचे गए। इस अवधि में पूरे देश में सख्त लॉकडाउन लागू था।
फाडा के मुताबिक 2.25 लाख वाहनों की बिक्री
वहीं, फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (फाडा) की ओर से पेश किए गए डाटा के मुताबिक, कुल 2,25,247 वाहनों की बिक्री की गई है। इसमें से 94,076 वाहनों की बिक्री फाडा के सदस्यों ने की है, जबकि 1,31,717 वाहनों की बिक्री फाडा के गैर सदस्य डीलर्स ने की है। सुप्रीम कोर्ट ने प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए 2017 में BS-IV वाहनों के रजिस्ट्रेशन पर 1 अप्रैल 2020 से रोक लगाने का आदेश दिया था।
कोर्ट ने मार्च में दी थी आंशिक छूट
सुप्रीम कोर्ट ने 27 मार्च को 10 फीसदी BS-IV वाहन बेचने की अनुमति दी थी। कोर्ट ने यह आंशिक छूट देशव्यापी लॉकडाउन के दौरान खराब हुए समय की भरपाई के लिए दी थी। कोर्ट ने कहा था कि लॉकडाउन खत्म होने के बाद 10 दिनों के भीतर इन वाहनों की बिक्री की जा सकती है। 24 जुलाई को सुनवाई के दौरान सड़क परिवहन मंत्रालय ने 31 मार्च के बाद वाहन पोर्टल पर अपलोड होने वाले वाहनों की जानकारी कोर्ट को दी थी। कोर्ट ने कहा था कि जिन वाहनों की जानकारी वाहन पोर्टल पर अपलोड है, वह केवल उनकी सुरक्षा कर सकती है।