Thursday, August 20, 2020

वर्क फ्रॉम होम के लिए ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी में कैसे हो सुधार? ट्राई ने मांगे सुझाव August 20, 2020 at 01:09AM

कोरोनावायरस संक्रमण के कारण भारत समेत पूरी दुनिया ने लॉकडाउन का सामना किया है। लॉकडाउन के दौरान कंपनियों ने अपने अधिकांश कर्मचारियों से वर्क फ्रॉम होम (घर से काम) कराया है। हालांकि, इस दौरान इंटरनेट कनेक्टिविटी की समस्या रही है। अब कंपनियों ने वर्क फ्रॉम होम को न्यू नॉर्मल बना लिया है और भविष्य में भी वर्क फ्रॉम होम कराने पर विचार कर रही हैं। ऐसे में इंटरनेट कनेक्टिविटी की समस्या का समाधान करने के लिए टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (ट्राई) सामने आया है। ट्राई ने ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी और इंटरनेट संबंधी सेवाओं में सुधार के लिए एक कंसलटेशन पेपर जारी कर सुझाव मांगे हैं।

इंटरनेट स्पीड 50 एमबीपीएस तक ले जाने के लिए मांगा रोडमैप

ट्राई ने सभी हित-धारकों से कहा है कि वे ग्राहकों की संख्या बढ़ने आधार पर ब्रॉडबैंड नेटवर्क का प्रदर्शन और इससे निपटने को लेकर सुझाव दें। साथ ही ट्राई ने हित-धारकों से कहा है कि वे नेशनल डिजिटल कम्युनिकेशंस पॉलिसी (एनडीसीपी) 2018 के उद्देश्यों के मुताबिक, इंटरनेट स्पीड को 50 मेगाबाइट प्रति सेकेंड (एमबीपीएस) तक ले जाने के लिए रोडमैप भी पेश करें।

इन चार मुद्दों पर भी मांगे सुझाव

  • 1- फिक्स्ड एंड मोबाइल ब्रॉडबैंक की परिभाषा।
  • 2- इंफ्रास्ट्रक्टर निर्माण के लिए इनोवेटिव अप्रोच।
  • 3- ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी को प्रमोट करना।
  • 4- ब्रॉडबैंड स्पीड को बढ़ाने के लिए उठाए जाने वाले कदम।

21 सितंबर तक दे सकते हैं सुझाव

ट्राई के कंसलटेशन पेपर के मुताबिक, सभी हितधारक अपने सुझाव 21 सितंबर तक दे सकते हैं। काउंटर सुझावों के लिए 5 अक्टूबर तक का समय दिया गया है। आपको बता दें कि डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्युनिकेशन (डीओटी) ने ट्राई से ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी को लेकर सिफारिशें मांगी हैं। इसके बाद ही ट्राई ने सभी हित-धारकों को सुझाव देने के लिए कंसलटेशन पेपर जारी किया है।



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लॉकडाउन के दौरान भारत समेत पूरी दुनिया में वर्क फ्रॉम होम का चलन बढ़ा है। हालांकि, इस दौरान इंटरनेट कनेक्टिविटी की समस्या रही है।

भारत में असेंबली प्लांट बंद करेगी हार्ले डेविडसन, अब थाइलैंड से बाइक होगी इम्पोर्ट; 50 हजार रुपए तक बढ़ सकती है कीमत August 20, 2020 at 01:06AM

हार्ले डेविडसन बाइक को पंसद करने वालों के लिए एक बेड न्यूज आई है। दरअसल, ये अमेरिकन कंपनी अब भारत में अपने असेंबली प्लांट को बंद कर रही है। ऐसा माना जा रहा है कि कंपनी ने ये फैसला घटती सेल्स के चलते लिया है। हालांकि, वो भारतीय बाजार में बाइक की बिक्री जारी रखेगी।

कंपनी ने एडवाइजर्स के माध्यम से कुछ ऑटोमोबाइल निर्मताओं को हरियाणा के बावल में स्थित लीज पर लिए गए असेंबली प्लांट के उपयोग के लिए एक संभावित आउटसोर्सिंग व्यवस्था के लिए कुछ लोगों को भेजा है। असेंबली बंद करने का फैसला उत्तरी अमेरिका, यूरोप और एशिया प्रशांत के उन हिस्सों में लिया गया है, जहां पर कंपनी की गाड़ियों के सेल्स डाउन हुई है।

कंपनी से मिली ये जानकारी
इस बारे में कंपनी से जुड़े एक सोर्स ने बताया कि कंपनी सिर्फ अपनी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट को बंद कर रही है। बाइक की मार्केटिंग और सेल्स जारी रहेगी। अब भारत में बाइक को थाइलैंड से इम्पोर्ट किया जाएगा। ऐसे में बाइक की कीमत 40 से 50 हजार रुपए बढ़ सकती है। बता दें कि देश भर में कंपनी के 20 हजार से ज्यादा कर्मचारी हैं। सेल्स में इजाफा करने के लिए कंपनी बाइक पर 70 हजार रुपए का बड़ा डिस्काउंट भी दे रही है।

पिछले फाइनेंशियल ईयर में 2500 भी नहीं बेचीं
जुलाई में दूसरी तिमाही के रिजल्ट के साथ एक बयान में हार्ले- डेविडसन ने कहा था कि कंपनी अंतरराष्ट्रीय बाजारों से बाहर निकलने की योजना का मूल्यांकन कर रही है, जहां प्रोडक्शन और लाभ फ्यूचर की रणनीति के अनुरूप निरंतर निवेश का समर्थन नहीं करते हैं। कंपनी ने भारत में पिछले फाइनेंशियल ईयर में 2,500 से कम यूनिट बेची थीं।

भारत में मिलने वाले हार्ले-डेविडसन के मॉडल



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अब भारत में बाइक को थाइलैंड से इम्पोर्ट किया जाएगा

किस तरह सर्विसिंग के दौरान आपका बिल बढ़ाया जाता है, आप कैसे बच सकते हैं August 19, 2020 at 11:41PM

कार सर्विस को लेकर हमेशा लोगों में मन में संशय रहता है कि सर्विस सेंटर पर कराई जाए या लोकल मैकेनिक से कराई जाएं। फ्री सर्विस खत्म होने के बाद कुछ लोग लोकल मैकेनिक के पास पहुंच जाते हैं तो कुछ सर्विस सेंटर को ही प्राथमिकता देते हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि सर्विसिंग के नाम पर किस तरह से आपकी जेब खाली की जाती है। नाम ना छापने की शर्त पर एक्सपर्ट ने कुछ अहम बातें बताईं...

पहला: ऑयल काला हो गया है चेंज करना पड़ेगा

  • आमतौर पर यह कहकर ऑयल चेंज करवा लिया जाता है कि ऑयल काला हो गया है लेकिन यह बिल्कुल गलत है। एक्सपर्ट ने बताया कि कितना भी अच्छा ऑयल हो इंजन में जाने के बाद काला हो ही जाता है। खासतौर से डीजल गाड़ियों की बात करें तो नया ऑयल भी जल्दी काला हो जाता है। ऐसे में आपको अनुभव है तो घर पर ही आप ऑयल डिप से ऑयल कि विस्कॉसिटी, क्वालिटी, टैक्सचर देख कर उसकी क्वालिटी का अंदाजा लगा सकते हैं।
  • अगर अनुभव नहीं हो तो सबसे सरल तरीका यह है कि सर्विस रिकॉर्ड के हिसाब से ऑयल चेंज करवाएं। एक साल कम्पलीट होने पर या 10 हजार किमी. या उससे ज्यादा चला लेने पर सर्विस जरूर कराएं, जिसमें ऑयल चेंज हो। क्योंकि सेमी सिंथेटिक ऑयल की नॉर्मल लाइफ 10 हजार किमी. होती है, मिनरल ऑयल की लाइफ इस भी कम होती है। फुल सिंथेटिक ऑयल की लाइफ 15 हजार किमी. तक होती है लेकिन उसमें भी यह सलाह दी जाती है कि 10 हजार किमी. तक एक बार टॉप-अप के लिए चेक करा लें क्योंकि हीट होने पर ऑयल थोड़ा वाष्प बनकर उड़ जाता है। लोकल मैकेनिक हो या अथॉराइज्ड सर्विस सेंटर ऑयल सामने चेंज करवाएं तो बेहतर होगा।

दूसरा: फुल सिंथेटिक ऑयल डलवा लो, गाड़ी की लाइफ बढ़ जाएगी

  • यह सही है कि फुल सिंथेटिक ऑयल से इंजन की लाइफ बढ़ती है लेकिन इसे डलवाना चाहिए या नहीं ये गाड़ी की रनिंग पर निर्भर करता है। लेकिन मैकेनिक पैसे कमाने के चक्कर में महंगा ऑयल डलवाने के लिए कह देते हैं। सिंथेटिक ऑयल की कीमत नॉर्मल ऑयल से तीन गुना अधिक तक होती है। सबको यह ऑयल डलवाने की जरूरत नहीं है। हां, अगर आपकी रनिंग ज्यादा है या आपकी गाड़ी ट्रैवल्स के में लगी है तो आपको फुल सिंथेटिक ऑयल डलवा सकते हैं।
  • एक्सपर्ट ने बताया कि सेमी सिंथेटिक और फुल सिंथेटिक ऑयल का सीधा असर गाड़ी के इंजन स्मूदनेस, रनिंग और वियर-एंड-टियर पर पड़ता है। जिनकी हाई रनिंग होती है उन लोगों को अपनी गाड़ी में फुल सिंथेटिक ऑयल ही डलवाना चाहिए खासतौर से डीजल इंजन में, इससे वियर-एंड-टियर कम होता है।
  • फुल सिंथेटिक में इंजन का परफॉर्मेंस अच्छा मिलेगा। ठंड के मौसम में भी सिंथेटिक ऑयल इंजन में जल्दी फैल जाता है, जामता नहीं है, तो अगर आप किसी बर्फीले इलाके में या ऐसी जगह रह रहे हैं जहां तापमान बेहद काम या माइनस में चला जाता है तो आप सिंथेटिक ऑयल ही यूज करें। नॉर्मल रनिंग है तो कम से कम सेमी सिंथेटिक ऑयल डलवाएं।

तीसरा: व्हील अलाइनमेंट-बैलेंसिंग करना पड़ेगा

  • बिल बढ़ाने के लिए आपसे फिजूल में व्हील बैलेंसिंग और अलाइनमेंट कराने के लिए कहा जा सकता है। लेकिन आप टायरों की कंडिशन इसका पता लगा सकते है कि क्या वाकई में इसकी जरूरत है भी या नहीं। अगर आगे के टायर अनियमित तरह से घिस रहे हैं, जैसे की अंदर की तरफ ग्रिप है लेकिन बाहर से घिस रहे हों या बाहर ग्रिप अच्छी है लेकिन अंदर की तरफ से घिस रहे हों तो व्हील अलाइनमेंट की बिल्कुल जरूरत है।
  • यदि हाई स्पीड (लगभग 80 किमी. प्रतिघंटा) पर यदि स्टीयरिंग व्हील में जर्क आ रहा है या वाइब्रेशन आ रहा है, तो बैलेंसिंग की जरूरत है। अगर इनमें से कोई परेशानी नहीं दिख रही है, तो वे वजह पैसे खर्च करने की जरूरत नहीं है। बाकी प्रॉपर शेड्यूलिंग की बात करें तो हर 5 हजार किमी. पर बैलेंसिंग और अलाइनमेंट कर लेना चाहिए और 10 हजार किमी.पर व्हील रोटेशन करना चाहिए।

चौथा: कूलिंग नहीं हो रही, एसी फिल्टर चेंज होगा

  • ज्यादातर लोगों को पता नहीं होता कि एसी फिल्टर कब चेंज कराना चाहिए और इसी बात का फायदा मैकेनिक उठाते हैं और फिजूल में एसी फिल्टर चेंज करवा लेते हैं। एक्सपर्ट ने बताया कि एसी फिल्टर हर 20 हजार किमी. पर बदला जाता है।
  • बेहतर होगी कि गर्मी का मौसम शुरू होने से पहले एक बार एसी चेक करा लें क्योंकि गर्मियों में ज्यादातर लोगों को शिकायत रहती है कि एसी कूलिंग नहीं कर रहा लेकिन होता है कि फ्रेश एयर एसी फिल्टर में जाम होने की वजह से अच्छी तरह से फ्लो नहीं होता। इसलिए गर्मी आने से पहले एक बार फिल्टर जरूर चेक करा लें।

पांचवा: बैटरी चेंज करवानी पड़ेगी, खराब हो गई है

  • बैटरी खराब हो रही है, ज्यादा दिन नहीं चलेगी, नई लगवा लो। यह कहकर भी कई मैकेनिक जबरन का बिल बढ़ा देते हैं। एक्सपर्ट ने बताया कि अगर बैटरी लेवल मेनटेन रहेगा और गाड़ी प्रोपर चलती रहेगी तो बैटरी में कोई समस्या नहीं आएगी और लंबे समय तक सर्विस दे जाएगी। इसलिए साल में दो बार बैटरी वॉटर टॉप-अप करा लें।
  • अगर बैटरी डिसचार्ज भी हो रही है जो एक-दो बार चार्ज करवा लें, जिसका खर्च बहुत मामूली होता है, अल्टीनेटर चेक करा लें, क्योंकि हो सकता है कि अल्टीनेटर खराब होने की वजह से भी बैटरी ड्रेन हो रही हो। अगर इन सब के बाद भी समस्या बनी हुई है, तो नई बैटरी लगवाना का डिसीजन लिया जा सकता है।

छठवां: एयर-ऑयल फिल्टर खराब हो गए हैं, नया लगाना पड़ेगा

फिल्टर खराब हो गए हैं, चेंज करना पड़ेगा और उस समय ग्राहक के पास हां कहने के अलावा कोई ऑप्शन नहीं होता। लोकल मैकेनिक फिल्टर में काफी बड़ी धांधली करते हैं, लोकल फिल्टर को ओरिजनल बता कर लगा देते हैं और अनुभव न होने के कारण हम उसकी पहचान भी नहीं कर पाते। इसलिए अगर फिल्टर्स चेंज भी करवाना पड़े तो अथॉराइज्ड सेंटर पर भरोसा किया जा सकता है।

सातवां: एसी गैस लीक हो गई है

  • यह कारण बता कर भी अच्छे खासे पैसे वसूले जा सकते हैं। कई बार एसी कूलिंग कम करता है और मैकेनिक हमें कारण बताता है कि एसी गैस खत्म हो गई है। आम आदमी को इसकी ज्यादा नॉलेज नहीं होती और यह मैकेनिक को अच्छी तरह पता होता है। एक्सपर्ट ने बताया कि अक्सर यह कारण बता कर लंबा बिल थमा दिया जाते है। हर कंपनी अलग अलग तरह की एसी गैस यूज करती है, इसी के जरिए एसी कूलिंग करता है। यह लाइफ टाइम के लिए होती है। बिना लीकेज गैस खत्म नहीं हो सकती है।
  • हालांकि आम आदमी के पास एसी गैस खत्म हुई है या नहीं इसे चेक करने का कोई तरीका नहीं होता। गाड़ी के साइज के अनुसार 250 ग्राम से 600 ग्राम तक एसी गैस डलती है, अगर वो कम होगी तो एसी अंदर परफॉर्म करेगा। अगर मैकेनिक मशीन से गैस निकाल कर बताएं कि इतनी गैस निकली है तब तो ठीक है वरना इसमें भी घपला किया जा सकता है।

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ऑयल के काला होने पर उसे चेंज कराने की जरूरत नहीं होती, बल्कि यह इस बात से तय किया जाता है कि उसे भरवाए कितना हुआ है या गाड़ी कितनी चली है।

गूगल मीट ऐप की मदद से टीवी पर कर पाएंगे वीडियो चैटिंग, कंपनी ने क्रोमकास्ट का सपोर्ट दिया August 19, 2020 at 11:08PM

एक तरफ जहां दुनियाभर में गूगल के कई एप्लिकेशन में प्रॉब्लम आ रही है, तो दूसरी तरफ कंपनी ने गूगल मीट में क्रोमकास्ट का सपोर्ट दे दिया है। यानी अब इस ऐप की मदद से यूजर्स टीवी पर वीडियो चैटिंग को स्ट्रीम कर पाएंगे।

क्रोमकास्ट सपोर्ट के साथ यूजर्स मीटिंग, वीडियो कॉल चैटिंग, ऑनलाइन लैक्चर और क्लासेस अपने घर की टीवी पर अटैंड कर पाएंगे। बड़ी स्क्रीन होने की वजह से वीडियो चैटिंग का एक्सपीरियंस भी बेहतर होगा। मार्केट में मौजूद स्मार्ट टीवी में क्रोमकास्ट का फीचर बिल्ट-इन आता है। आपके टीवी में क्रोमकास्ट नहीं दिया तब ये फीचर काम नहीं करेगा। स्मार्टफोन में गूगल क्रोमकास्ट नहीं होने पर उसका ऐप इन्स्टॉल कर सकते हैं।

स्मार्टफोन का सपोर्ट होगा जरूरी
क्रोमकास्ट की मदद से आपके स्मार्टफोन का आउटपुट टीवी पर नजर आएगा, लेकिन कैमरा और माइक्रोफोन के लिए आपको स्मार्टफोन का ही इस्तेमाल करना होगा। गूगल ने जून के आखिर में गूगल मीट और गूगल डुओ पर ग्रुप कॉल सर्विस शुरू की थी।

गूगल मीट का क्रोमकास्ट पर इस्तेमाल

  • सबसे पहले क्रोम ब्राउजर में या गूगल कैलेंडर ऐप में गूगल कैलेंडर को ओपन करें
  • अब यहां प्लस आइकॉन पर क्लिक करके मोर ऑप्शन को सिलेक्ट करें
  • यहां इवेंट क्रिएट करके उससे जुड़ी इन्फॉर्मेशन की जानकारी देनी होगी
  • मीटिंग का डेट और टाइम भी यहां पर दिया जाएगा, जो यूजर्स को नोटिफाई करेगा
  • अब आप जिन लोगों के साथ वीडियो चैट करना चाहते हैं उनके जोड़ लें
  • आप एक बार में 250 लोगों को वीडियो चैटिंग के लिए जोड़ सकते हैं
  • अब मीट ऐप या गूगल कैलेंडर पर मीटिंग ओपन करें और फिर 'Cast this meeting' को चुनें
  • Cast टैब में उस कास्ट अनेबल डिवाइस का सिलेक्शन करें, जिसका इस्तेमाल आप करना चाहते हैं
  • मीटिंग के दौरान कास्टिंग में स्विच करने के लिए नीचे आ रहे 3 डॉट्स मैन्यू पर टैप करें और Cast this meeting का सिलेक्शन करें।

गूगल मीट का क्रोमकास्ट पर इस्तेमाल करने से पहले आपके इस्तेमाल में आने वाले सभी ऐप्स को अपडेट करना होगा। यदि ऐप्स अपडेट नहीं होंगे तब इस फीचर नहीं मिलेगा।



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मार्केट में मौजूद स्मार्ट टीवी में क्रोमकास्ट का फीचर बिल्ट-इन आता है
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