Friday, May 1, 2020

कोविड-19 की वजह से टू-व्हीलर की बिक्री में हो सकती है बढ़ोतरी, सोशल डिस्टेंसिंग बनेगा बड़ा कारण May 01, 2020 at 06:20AM

देश की ऑटो इंडस्ट्री की हालत चिंताजनक है। इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है किसी महीने में एक भी कार नहीं बिकी। बता दें कि देश में नेशनल लॉकडाउन के चलते किसी भी कंपनी की कोई कार नहीं बिकी है। वहीं, आने वाले कुछ महीनों में कार की बिक्री पर असर रहेगी। हालांकि, ऑटोकार की रिपोर्ट के मुताबिक लॉकडाउन के बाद दो पहिया वाहनों की बिक्री बढ़ सकती है। बता दें कि देश में 1 अप्रैल से BS6 नोर्म्स वाली गाड़ियां चलाना ही अनिवार्य हो गया है। पहले ऐसा माना जा रहा था कि BS4 इंजन से BS6 इंजन पर स्विच करने से टू-व्हीलर की सेल पर असर होगा, क्योंकि इससे गाड़ी की कीमत में बढ़ोतरी हुई है। लेकिन अब कोविड-19 के चलते इसकी बिक्री में तेजी देखने को मिल सकती है।

रिपोर्ट के मुताबिक ये साल टू-व्हीलर की बिक्री के लिए अब तक अच्छा नहीं रहा। पहले जहां BS6 इंजन के चलते टू-व्हीलर की कीमतें बढ़ी। तो अब कोविड-19 महामारी के चलते गाड़ियों की ब्रिकी पूरी तरह रुक गई। ऐसा माना जा रहा है कि फेस्टिव सीजन तक राहत की उम्मीद नहीं है। हालांकि, लॉकडाउन हटने के बाद कोविड के कारणों से ही टू-व्हीलर की बिक्री में बढ़ोतरी देखने को मिलगी। बता दें कि 25 मार्च से शुरू हुए लॉकडाउन को तीन अलग-अलग फेज में 17 मई तक बढ़ा दिया गया है।

  • कोविड-19 से बचने के लिए वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाइजेशन और सरकार की तरफ से जो एडवाइजरी जारी की गई है, उसके मुताबिक इस महामारी से बचने के लिए सोशल डिस्टेंसिंग का फॉलो करना जरूरी है। ऐसे में लोग खुद को सेफ करने के लिए दूसरे लोगों से डिस्टेंस बनाकर रखेंगे। यानी वे पब्लिक ट्रांसपोर्ट से दूरी बनाकर रखना चाहेंगी। वहीं, रोजमर्रा के काम निपटाने और ऑफिस आने-जाने के लिए टू-व्हीलर अच्छा विकल्प बना सकता है।
  • पब्लिक ट्रांसपोर्ट पर रोजाना सैंकड़ों लोग सफर करते हैं। ऐसी स्थिति में वे सफल के लिए कितने सुरक्षित रहेंगे, इस बात को अभी समझ पाना थोड़ा मुश्किल है। देश का बड़ा वर्ग पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करता है। ऐसे में जब वो इसका इस्तेमाल करने से बचेगा तब उसके पास टू-व्हीलर सबसे अच्छा विकल्प होता है, क्योंकि वो कार की तुलना में इसे आसानी से खरीद सकता है। वहीं, कार की तुलना में टू-व्हीलर का माइलेज ज्यादा और मेंटेनेंस कम होता है।
  • पिछले दो महीने में टू-व्हीलर की बिक्री के आंकड़े भी निराशाजनक हैं। वहीं, आने वाले कुछ महीने या लॉकडाउन के रहने तक ये आंकड़े मैन्युफैक्चरर्स को निराश कर सकते हैं। ऐसे में टू-व्हीलर कंपनियां घाटे से बचने के लिए ग्राहकों के लिए कुछ ऑफर्स भी लेकर आ सकती हैं।

अप्रैल महीने में एक भी कार नहीं बिकी। इस पर फाडा (फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया) प्रेसिडेंट आशीष हर्षराज काले ने कहा, "लॉकडाउन के चलते नई गाड़ियों के बिक्री पूरी तरह बंद है। जो भी गाड़ियों लॉकडाउन से पहले बेची गई थी, सिर्फ आरटीओ में उनकी की प्रॉसेस पूरी हो रही है। आने वाले महीनों में भी हमारे लिए मुश्किल समय होगा। क्योंकि जब भी हमने स्लोडाउन या मंदी को फेस की है, तब वो डिमांड साइट से ही होती है। लेकिन इस बार 3 से 4 तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा। जैसे, लॉकडाउन खुलते ही डिमांड कम रहेगी। इकोनॉमिक स्थिति कैसी रहती है इसका पता भी बाद में ही चलेगा। सप्लाई की तरफ से भी सपोर्ट नहीं मिल पाएगा, क्योंकि सभी प्रोजेक्ट को दिन-रात के लिए शुरू नहीं किया जा सकता। हो सकता है कि पहले 2 या 3 जोन ही खुलें। ऐसे में यदि कोई कम्पोनेंट मैन्युफैक्चर रेड जोन में हुआ तब भी गाड़ी का प्रोडक्शन शुरू नहीं हो पाएगा। लॉकडाउन खुलने के बाद सप्लाई की क्या स्थिति बनती है, ये आगे ही पता चलेगी।"



Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
पहले ऐसा माना जा रहा था कि BS4 इंजन से BS6 इंजन पर स्विच करने से टू-व्हीलर की सेल पर असर होगा, क्योंकि इससे गाड़ी की कीमत में बढ़ोतरी हुई है।

पहली तिमाही में वैश्विक स्मार्टफोन शिपमेंट 13 फीसदी गिरी, पांच साल में पहली बार आंकड़ा 30 करोड़ यूनिट्स के नीचे पहुंचा May 01, 2020 at 04:58AM

वैश्विक स्मार्टफोन मार्केट पर भी कोरोनावायरस का काफी गहरा असर पड़ा है। रिसर्च फर्म कैनालिक ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि स्मार्टफोन शिपमेंट की दर 13 फीसदी गिरकर 27.2 करोड़ यूनिट पर तक पहुंच गई। काउंटर पॉइंट रिसर्च ने भी अपनी रिपोर्ट में बताया कि मार्च 2014 तिमाही के बाद ऐसा पहली बार देखने को मिला है जब किसी तिमाही में ग्लोबली स्मार्टफोन शिपमेंट का आंकड़ा 30 करोड़ यूनिट से कम रहा। रिपोर्ट में कहा गया है कि कोरोना के कारण अगली तिमाही में इससे भी बुरा असर देखने को मिल सकता है।

कैनालिस में आगे बताया कि स्मार्टफोन मार्केट ने 2020 में अच्छी खासी शुरुआती की थी लेकिन कोरोना के कारण नए डिवाइस की मांग खत्म हो गई। जब कोरोना चीन में फैलाना शुरू हुआ तो वेंडर्स को यही चिंता सता रही थी कि ग्लोबाल मार्केट में स्मार्टफोन की डिमांड की पूर्ति कैसे की जाएगी। लेकिन मार्च में सारी परिस्थितियां बदल गई। स्मार्टफोन निर्माता धीरे-धीरे रिकवर कर रहे हैं लेकिन कई देशों में जारी लॉकडाउन के कारण बिक्री रूकी हुई है।

लोगों ने फोन खरीदने का प्लान टाला
स्टैनटोन में बताया कि फोन अभी भी लोगों की जरूरत बना हुआ है। जिनके फोन चोरी हो गए हैं या खराब हो गए हैं वो ऑनलाइन चैनल से इसे खरीद रहे हैं लेकिन जो लग्जरी के लिए फोन खरीदना चाहते हैं उन्होंने अभी फोन खरीदने के फैसले को टाल दिया है।

21.9 मार्केट शेयर के साथ सैमसंग आगे
कैनालिस की रिपोर्ट के मुताबिक, सैमसंग सबसे आगे रहा, मार्च तिमाही में कंपनी का मार्केट शेयर 21.9 फीसदी रहा,जिसके बाद हुवावे 18 फीसदी, एपल 13.6 फीसदी, शाओणी 11.1 फीसदी और वीवो 8.9 फीसदी का स्थान रहा।

चीन में शिपमेंट 27 फीसदी गिरी
काउंटर पॉइंट रिसर्च के मुताबिक, पहली तिमाही में सबसे 27 फीसदी शिपमेंट चीन में गिरी, जहां से महामारी दुनियाभर में फैली। चीन में महामारी फैलने के बाद अन्य कंपनियों को हैंडसेट के कम्पोनेंट्स नहीं पहुंच पाए, जिसने ग्लोबल शिपमेंट को काफी नुकसान पहुंचाया।

गेमिंग और ओटीटी सर्विस का ग्राफ बढ़ा
लॉकडाउन के कारण स्मार्टफोन शिपमेंट में भले ही गिरावट रही लेकिन घर पर रहने की वजह से लोगों ने स्मार्टफोन का काफी इस्तेमाल किया, जिसके बाद गेमिंग और ओटीटी सर्विस का ग्राफ लगातार बढ़ाता चला गया। इस दौरान ऑपरेटर्स ने काफी मात्रा में डेटा पैक की बिक्री की।



Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
कैनालिस ने रिपोर्ट में बताया कि स्मार्टफोन बाजार की 2020 में अच्छी शुरुआत हुई थी, लेकिन कोरोना संकट ने मांग लगभग खत्म कर दी

BS6 डीजल कार खरीदने का प्लान कर रहे हैं तो इकोस्पोर्ट, नेक्सन समेत ये 11 कारें हो सकती हैं बेस्ट ऑप्शन, 25.40kmpl तक का माइलेज मिलेगा May 01, 2020 at 02:31AM

नए एमिशन नॉर्म्स को देखते हुए तमाम कंपनियों ने अपने बीएस 6 पेट्रोल और डीजल व्हीकल लॉन्च किया है। लॉकडाउन के दौरान देशभर के डीलरशिप बंद है, ऐसे में शोरूम पर जाकर कार के बारे में जानकारी जुटाना फिलहाल मुश्किल है। लॉकडाउन खत्म होने के बाद अगर डीजल कर खरीदने की प्लानिंग कर रहे हैं, तो हम कुछ ऐसे ऑप्शन्स बता रहे हैं, जिनमें 25.40 किमी प्रति लीटर तक का माइलेज मिलेगा....

फोर्ड इकोस्पोर्ट
माइलेज: 21.7 किमी प्रति लीटर
कीमत: 8.54 लाख से 11.67 लाख रुपए (दिल्ली एक्स-शोरूम)

फोर्ड की यह कॉम्पैक्ट एसयूवी भारतीय बाजार में काफी लोकप्रिय है। इसमें 1.5 लीटर का बीएस 6 डीजल इंजन मिलेगा, जो 100 हॉर्स पावर की ताकत और 215 एनएम कास टॉर्क जनरेट करता है। इसका 21.7 किमी प्रति लीटर का माइलेज मिलता है, जोकि ARAI सर्टिफाइड है। यह क्रेटा से 0.3kpl ज्यादा माइलेज देती है।

टाटा नेक्सन
माइलेज: 22.4 किमी प्रति लीटर
कीमत: 8.54 लाख से 12.70 लाख रुपए (एक्स-शोरूम)

इसे टाटा की सबसे छोटी डीजल कार कहना गलत नहीं होगा। इसमें 1.5 लीटर का फोर सिलेंडर, टर्बो-डीजल इंजन है, जिसमें 110 हॉर्स पावर की ताकत और 260 एनएम का टॉर्क मिलता है। इसका ARAI रेटेड माइलेज 22.4 किमी प्रति लीटर है। यह 6 स्पीड मैनुअल और ऑटोमैटिक गियरबॉक्स ऑप्शन में अवेलेबल है।


हुंडई वेन्यू
माइलेज: 23.3 किमी प्रति लीटर
कीमत: 8.10 लाख से 11.40 लाख रुपए (एक्स-शोरूम)

इसे भारत की सबसे अफॉर्डेबल और फ्यूल एफिशिएंट कॉम्पैक्ट एसयूवी भी कहा जा सकता है। इसमें 1.5 लीटर का फोर सिलेंडर टर्बो डीजल इंजन मिलेगा, जिसमें 100 हॉर्स पावर की ताकत और 240 एनएम का टॉर्क मिलता है। यह 6 स्पीड मैनुअल गियरबॉक्स में अवेलेबल है। इसमें 23.3 किमी प्रति लीटर का माइलेज मिलेगा।

फोर्ड फ्रीस्टाइल
माइलेज: 23.8 किमी प्रति लीटर
कीमत: 7.34 लाख से 8.19 लाख रुपए (एक्स-शोरूम)

इकोस्पोर्ट की तरह इसमें भी 1.5 लीटर का फोर सिलेंडर टर्बो-डीजल इंजन है, जिसमें 100 हॉर्स पावर की ताकत और 215 एनएम का टॉर्क मिलता है। कार में 23.8 किमी प्रति लीटर मिलता है जो इकोस्पोर्ट्स की तुलना में ज्यादा है। इसमें 5 स्पीड मैनुअल ट्रांसमिशन अवेलेबल है। यह 96 हॉर्स पावर वाले 1.2 लीटर पेट्रोल इंजन में भी अवेलेबल है।

फोर्ड फिगो और एस्पायर
माइलेज: 24.4 किमी प्रति लीटर
फिगो कीमत: 6.86 लाख से 7.85 लाख रुपए (एक्स-शोरूम)
एस्पायर कीमत: 7.49 लाख से 8.34 लाख रुपए (एक्स-शोरूम)

फिगो हैचबैक की बात करें या कॉम्पैक्ट सेडान एस्पायर की दोनों में ही कंपनी का दमदार 1.5 लीटर का फोर सिलेंडर इंजन है, जो 100 हॉर्स पावर और 215 एनएम का टॉर्म जनरेट करता है। दोनों ही 5 स्पीड मैनुअल ट्रांसमिशन में अवेलेबल है। दोनों में ही 24.4 किमी प्रति लीटर मिलता


होंडा अमेज
माइलेज: 24.7 किमी प्रति लीटर
कीमत: 7.34 लाख से 8.19 लाख रुपए (एक्स-शोरूम)

होंडा की कॉम्पैक्ट सेडान अमेज सबसे ज्यादा बिकने वाली कारों में से एक है। इसके 1.5 लीटर फोर सिलेंडर टर्बो डीजल इंजन में अवेलेबल है। इसके 5 स्पीड मैनुअल ट्रांसमिशन वर्जन में 100 हॉर्स पावर और 200 एनएम टॉर्क मिलता है। इसमें 24.7 किमी प्रति लीटर का माइलेज मिलेगा। जबकि इसके सीवीटी ट्रांसमिशन वर्जन में 80 हॉर्स पावर और 160 एनएम का टॉर्क मिलेगा। इसमें 21 किमी प्रति लीटर का माइलेज मिलेगा।

हुंडई वरना
माइलेज: 25 किमी प्रति लीटर
कीमत: 10.66 लाख से 15.10 लाख रुपए (एक्स-शोरूम)

जबतक नेक्स्ट जनरेशन होंडा सिटी बाजार में नहीं आ जाती जबतक हुंडई वरना ही इकलौती मिड साइज सेडान बाजार में अवेलेबल है। इसमें 1.5 लीटर का फोर सिलेंडर टर्बो डीजल इंजन है, इसमें 115 हॉर्स पावर और 250 एनएम का टॉर्क मिलता है। यह 6 स्पीड मैनुअल (माइलेज- 25 किमी प्रति लीटर) और टॉर्क कन्वर्टर (माइलेज- 21.3 किमी प्रति लीटर) ऑप्शन में अवेलेबल है।


हुंडई ग्रैंड i10 निओस
माइलेज: 25.1 किमी प्रति लीटर
कीमत: 6.75 लाख से 8.04 लाख रुपए (एक्स-शोरूम)

इसमें 1.2 लीटर U2 CRDi इंजन है, जोकि भारत में अवेलेबल अबतक का सबसे छोटा डीजल इंजन है। तीन सिलेंडर वाले इस इंजन में 75 हॉर्स पावर की ताकत मिलती है। यह 5 स्पीड मैनुअल और ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन में अवेलेबल है। इसमें 25.1 किमी प्रति लीटर का माइलेज मिलता है। फिलहाल इसके ऑटोमैटिक वर्जन के माइलेज के आंकड़े जारी नहीं किए गए हैं।

टाटा अल्ट्रोज
माइलेज: 25.11 किमी प्रति लीटर
कीमत: 6.99 लाख से 9.34 लाख रुपए (एक्स-शोरूम)

टाटा के यह प्रीमियम हैचबैक भारत में अवेलेबल सबसे फ्यूल एफिशियंट डीजल हैचबैक है। इसमें 25.11 किमी प्रति लीटर जो ARAI सर्टिफाइड है। यह सिर्फ 5 स्पीड मैनुअल गियरबॉक्स वर्जन में अवेलेबल है। इसमें 1.5 लीटर का फोर सिलेंडर टर्बो इंजन है, जिसमें 90 हॉर्स पावर और 200 एनएम की ताकत मिलती है।

हुंडई ऑरा
माइलेज: 25.40 किमी प्रति लीटर
कीमत: 7.74 लाख से 9.23 लाख रुपए (एक्स-शोरूम)

हुंडई की इस कॉम्पैक्ट सेडान में 1.2 लीटर का थ्री सिलेंडर टर्बो डीजल इंजन है। यह 75 हॉर्स पावर और 190 एनएम का टॉर्क जनरेट करता है। इसके 5 स्पीड मैनुअल ट्रांसमिशन वर्जन में 25.35 किमी प्रति लीटर का माइलेज और 5 स्पीड ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन वर्जन में 25.40 किमी प्रति लीटर का माइलेज मिलता है।


(माइलेज के आंकड़ें ARAI सर्टिफाइड हैं, ड्राइविंग स्टाइल के हिसाब से यह बदल सकते हैं)



Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
इतिहास में पहली बार अप्रैल में किसी भी कंपनी की एक भी कार नहीं बिकी

ग्रीन जोन में मारुति-हुंडई के डीलर्स शुरू कर रहे कामकाज, मई में सकारात्मक नतीजे मिलने की उम्मीद May 01, 2020 at 12:02AM

शुक्रवार को लगभग सभी कंपनियों ने अपनी सेल्स रिपोर्ट जारी कीं। इसमें बेहद चौंकाने वाला आंकड़ें सामने आए। रिपोर्ट के मुताबिक, किसी भी कंपनी की एक भी कार नहीं बिकी। चाहे देश में सबसे ज्यादा कारों की बिक्री करने वाली मारुति सुजुकी की बात करें या लग्जरी कार बनाने वाली मर्सिडीज, सभी का एक जैसा हाल था। देश के सात दशक के इतिहास में पहली बार ऑटोमोटिव कंपनियों ने इन हालातों का सामना किया। व्यापार को दोबारा पटरी पर लाने के लिए ऑटो कंपनियों में कदम बढ़ाना शुरू कर दिए हैं। सरकार द्वारा बनाए गए ग्रीन जोन में आदेशानुसार डीलर्स शोरूम दोबारा शुरू कर रहे हैं। उम्मीद की जा रही है इससे मई के आंकड़ों में थोड़ा इजाफा जरूर देखने को मिलेगा।

ग्रीन जोन में ऑटो कंपनियों ने कामकाज शुरू किया
देश में दो बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी और हुंडई ने सरकार के आदेशानुसार ग्रीन जोन में स्थित कई डीलर आउटलेट और सर्विस सेंटर्स शुरू कर दिए हैं वहीं देश के कई हिस्सों में परमिशन का इंतजार किया जा रहा है। वहीं टाटा मोटर्स, होंडा कार्स, फॉक्सवैगन और टोयोटा जैसे ब्रांड्स ने अपने ऑपरेशन शुरू करने से पहले डीलर्स के लिए कुछ स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रक्रियाएं और गाइडलाइन्स जारी की हैं।

कंपनी के पास 13 हजार कारों की इन्वेंट्री- मारुति सुजुकी
मारुति सुजुकी इंडिया के हेड आरसी भार्गव ने बताया कि सभी ऑटो कंपनियां दुकानें और प्रतिष्ठान अधिनियम के अंतर्गत आती हैं, ऐसे में कुछ जगहों पर जिसे सरकार ने ग्रीन जोन बनाया है वहा आउटलेट खोलने की इजाजत मिल गई है। यह एक सकारात्मक कदम है क्योंकि कई कंपनियां इस वक्त कैश की समस्या से जूझ रहे हैं। यह समस्या बिक्री शुरू होने के बाद और बुकिंग्स मिलने पर सही हो सकेंगी। इस समय कंपनी की फैक्ट्री और डीलरों के पास 13 हजार कारों की इन्वेंट्री है।

डीलर्स को भेजेंग मास्क और सैनेटाइजर- हुंडई
हुंडई इंडिया के तरुण गर्ग (सेल्स एंड मार्केटिंग डायरेक्टर) ने बताया कि सरकार की तरफ से लॉकडाउन में दी गई ढील से डीलर्स आगे की तैयारी कर सकेंगे। अन्य कंपनियों की तरह हुंडई ने आगे काम करने के लिए चैनल पार्टनर्स के साथ गाइडलाइन शेयर कर दी है। हमने 5 लाख मास्क और सैनेटाइजर्स डीलरों को भिजवा रहे हैं। इस समय कंपनी के पास 50 हजार कारों की इन्वेंट्री मौजूद है।

फॉक्सवैगन के ज्यादातर डीलरशिप रेड जोन में
जर्मन कार कंपनी फॉक्सवैगन के एग्जीक्यूटिव का कहना है कि उनकी डीलरशिप लॉकडाउन पूरी तरह से खत्म होने के बाद ही खुल सकेंगे, क्योंकि कंपनी के ज्यादातर डीलरशिप रेड जोन में स्थित हैं।

ऐसे समझें जोन का गणित

देश में कुल 733 जिले। इसमें से 130 रेड जोन, 284 ऑरेंज जोन और 319 ग्रीन जोन में।जहां सबसे कम मामले वे जिले रेड जोन में, जहां 14 दिन से नए मामले सामने नहीं आए वे जिसे ऑरेंज जोन में और जहां 21 दिन से नए मामले सामने नहीं आए वे जिसे ग्रीन जोन में हैं।

38 फीसदी जिले ऑरेंज जोन में हैं



Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
कई ऑटो कंपनियों ने कोरोना संकट के दौरान आगे काम करने के लिए नई गाइडलाइन तैयार की हैं
Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...