Thursday, October 22, 2020

महंगी स्मार्टवॉच का फील देगा भारतीय ब्रांड का यह सस्ता फिटनेस बैंड, कीमत 2 हजार रुपए से भी कम October 21, 2020 at 08:18PM

जेब्रोनिक्स ने अपने लेटेस्ट स्मार्ट फिटनेस बैंड को लॉन्च किया है। डिवाइस का नाम है ZEB-FIT920CH। यह सात स्पोर्ट्स मोड के साथ आता है। इसकी कीमत 1699 रुपए है। फिटबैंड में हार्ट रेट मॉनिटर सिस्टम, स्लीप मॉनिटरिंग समेत स्टेप्स और कैलोरी ट्रैकिंग जैसे फीचर्स मिलेंगे। खासबात यह है कि पारंपरिक फिटबैंड डिजाइन से विपरीत कंपनी ने इसे स्मार्टवॉच जैसा दिया है। बैंड दो कलर ऑप्शन- रेड और ब्लैक में उपलब्ध होगा। 1699 रुपए कीमत के साथ यह अमेजन पर उपलब्ध है।

जेब्रोनिक्स ZEB-FIT920CH के खास फीचर्स

  • फिटबैंड में 1.37 इंच का टीएफटी स्क्वायर शेप डिस्प्ले दिया गया है और यह 100+ प्री-लोडेड वॉच फेसेस के साथ आता है।
  • ZEB-FIT 20 सीरीज़ ऐप का उपयोग करके स्मार्टफोन के साथ फिटनेस बैंड को कनेक्ट किया जा सकता है।
  • ऐप के उपयोग से यूजर स्मार्टफोन पर स्पीड पैटर्न, हार्ट-रेट और स्टेप काउंट की निगरानी कर सकते हैं।
  • कंपनी का दावा है कि ZEB-FIT920CH वॉटरप्रूफ ड्यूरेबिलिटी के साथ आता है।
  • इसके अलावा आउटडोर यूज के लिए स्पोर्ट्स मोड भी है, जिसमें बैडमिंटन, साइकिलिंग और फुटबॉल शामिल हैं।
  • स्मार्ट वियरेबल योग्य होने के नाते इससे फोन के कैमरा को भी कंट्रोल किया जा सकेगा।
  • बैंड में फाइंड फोन का फीचर भी मिलेगा, जिससे स्मार्टवॉच से दूर होने पर फोन को ढूंढा जा सकेगा।


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बैंड में फाइंड माय फोन फीचर भी मिलेगा, जिससे बैंड से दूर होने पर फोन को ढूंढा जा सकेगा

आपके पास क्यों आ रहा किसी नंबर से कॉल, पहले ही पता चल जाएगा; जानिए ऐप के 3 नए फीचर के बारे में October 21, 2020 at 06:49PM

आपके पास किसी अनजान नंबर से कॉल किस काम के लिए आ रहा है, इस बात का पता चल जाए तब कॉल रिसीव करना ज्यादा आसान हो जाएगा। अब कॉलर आईडी का काम करने वाला ट्रूकॉलर (Truecaller) ऐप ऐसा ही फीचर लेकर आ रहा है। कंपनी इस फीचर को एंड्रॉयड यूजर्स के लिए ग्लोबल रोलआउट कर रही है। बता दें कि ट्रूकॉलर ऐप की मदद से उन कॉल के बारे में भी पता चल जाता है, जो कॉन्टैक्ट नंबर फोन में सेव नहीं होते।

Truecaller पर मिलेंगे 3 नए फीचर
ट्रूकॉलर द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, अब इस ऐप में तीन नए फीचर को जोड़ा गया है। इसमें पहला कॉल रीजन, दूसरा शेड्यूल SMS और तीसरा SMS ट्रांसलेशन शामिल है। आइए इन सभी फीचर्स के बारे में जानते हैं...

1. कॉल रीजन : इस फीचर की मदद से यूजर्स कॉल करने की वजह पहले ही सेट कर पाएंगे। ताकि कॉल रिसीव करने वाले यूजर को कॉल रिसीव करने से पहले उसकी वजह का पता चल जाए। यानी ये कॉल पर्सनल, बिजनेस या फिर अर्जेंट रीजन के साथ किया गया है। इस फीचर की मदद से कॉल के दौरान एक नोट भी भेजा जा सकेगा, जिसमें इसकी वजह लिखी होगी। ऐसे में जिन लोगों के पास नए नंबर से कॉल आ रहा है उनके लिए ये फीचर काफी मददगार होगा।

2. शेड्यूल SMS : इस फीचर की मदद से यूजर्स किसी इवेंट, मीटिंग या फिर अन्य वजह से किए जाने वाले मैसेज रिमाइंडर को शेड्यूल कर पाएंगे। इसका फीचर का इस्तेमाल करने के लिए यूजर को मैसेज भेजते वक्त डेट और टाइम भी सेट करना होगा। ऐसा करने से आपके द्वारा तय किए गए टाइम पर SMS सेंड हो जाएगा।

3. SMS ट्रांसलेशन : इस फीचर की मदद से किसी अन्य भाषा में मिलने वाले मैसेज को आप अपनी भाषा में ट्रांसलेट करके पढ़ पाएंगे। यह फीचर गूगल की ML Kit से पावर्ड है, ऐसे में सभी मैसेज फोन पर ही लोकली प्रोसेस और ट्रांसलेट किए जाएंगे। यह फीचर 59 भाषाओं को सपोर्ट करता है, जिसमें आठ भारतीय भाषाएं हैं। इस फीचर उन लोगों की काफी मदद मिलेगी जिन्हें अंग्रेजी में मैसेज आते रहते हैं, लेकिन यूजर उन मैसेज को पढ़ नहीं पाते।



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ट्रूकॉलर के मुताबिक ऐप में तीन नए फीचर को जोड़ा गया है

फेस्टिव सीजन पर घर लाएं 6 लाख रुपए से कम बजट की ये 6 कारें, मिलेगा 22.05kmpl तक का माइलेज October 21, 2020 at 05:00PM

नवरात्रि और दिवाली पर लोग जमकर नए वाहनों की खरीदारी करते हैं। कंपनियां भी इस दौरान भारी डिस्काउंट ऑफर करती हैं। इसलिए नई कार खरीदने के लिए लोग फेस्टिव सीजन का इंतजार करते हैं।
अगर आप भी नई कार खरीदने का प्लान कर रहे हैं, वो भी कम बजट में, तो हमने यहां एक लिस्ट तैयार की है, जिसमें 6 किफायती बीएस 6 कारों को शामिल किया है। इसमें अच्छा-खासा माइलेज भी मिल जाएगा। नीचे देखें लिस्ट...

1. मारुति सुजुकी अल्टो 800 बीएस 6
शुरुआती कीमत:
2.94 लाख रुपए
ARAI माइलेज: 22.05 kmpl

  • मारुति सुजुकी ऑल्टो 800 भारत की सबसे पुरानी और सबसे ज्यादा बिकने वाली कारों में से एक है। हाल ही में इसने भारतीय बाजार में अपने 16 साल पूरे कर लिए हैं।
  • नई 2020 बीएस 6 मारुति सुजुकी ऑल्टो 800, 796 सीसी के थ्री सिलेंडर पेट्रोल इंजन से लैस है। यह फैक्ट्री फिटेड S-CNG किट के साथ भी उपलब्ध है।
  • इसमें 6000 आरपीएम पर 47.3 पीएस का पावर और 3500 आरपीएम पर 69 एनएम का टार्क मिलता है। इसमें सिर्फ 5-स्पीड मैनुअल गियरबॉक्स का विकल्प मिलता है।
  • इसमें 22.05 किमी. प्रति लीटर का माइलेज मिलता है, जो ARAI-प्रमाणित है। इसकी कीमत 2.94-3.89 लाख रुपए (एक्स-शोरूम दिल्ली) तक है।

2. डैटसन रेडी गो बीएस 6
शुरुआती कीमत:
2.83 लाख रुपए
ARAI माइलेज: 22.0 kmpl

  • निसान ने हाल ही में भारत में ऑल न्यू 2020 डैटसन रेडी-गो फेसलिफ्ट बीएस 6 को लॉन्च किया। यह पहले से ज्यादा अट्रैक्टिव और फीचर-लोडेड है।
  • इसमें दो बीएस 6 पेट्रोल इंजन ऑप्शन मिलते हैं, जिसमें 800 सीसी और 1.0-लीटर इंजन शामिल है।
  • 800 सीसी इंजन, 54 पीएस का पॉवर और 72 एनएम का टार्क जनरेट करता है और इसे 5-स्पीड मैनुअल गियरबॉक्स के साथ जोड़ा गया है।
  • 1.0-लीटर पेट्रोल इंजन 68 पीएस का पावर और 91 एनएम का टार्क जनरेट करता है। इसमें 5-स्पीड मैनुअल और 5-स्पीड एएमटी दोनों विकल्प मिल जाते हैं।
  • इसमें 22.0 किमी. प्रति लीटर का माइलेज मिलता है, जो ARAI प्रमाणित है। इसकी कीमत 2.83-4.77 लाख रुपए (एक्स-शोरूम दिल्ली) तक है।

3. रेनो क्विड बीएस 6
शुरुआती कीमत:
2.83 लाख रुपए
ARAI माइलेज: 22.0 kmpl

  • रेनो क्विड एक बहुत ही अच्छी दिखने वाली कार है। हैचबैक में रफ एंड टफ डिजाइन एलीमेंट्स भी देखने को मिल जाते हैं, जो इसे एसयूवीईश अपील देते हैं।
  • इसमें दो पेट्रोल इंजन ऑप्शन मिल जाते हैं जिसमें 800 सीसी और 1.0-लीटर शामिल है।
  • 799 सीसी इंजन, 5678 आरपीएम पर 54 पीएस का पावर और 4386 आरपीएम पर 72 एनएम का टार्क जनरेट करता है। इसमें केवल 5-स्पीड मैनुअल गियरबॉक्स का विकल्प मिलेगा।
  • 1.0-लीटर पेट्रोल इंजन, 5500 आरपीएम पर 68 पीएस का पावर और 4250 आरपीएम पर 91 एनएम का टार्क जनरेट करता है। इसमें 5-स्पीड मैनुअल और AMT दोनों गियरबॉक्स का विकल्प मिलते हैं।
  • इसमें 22.0 kmpl तक का माइलेज मिलता है, जो ARAI-प्रमाणित है। इसकी कीमत 2.92-5.01 लाख रुपए (एक्स-शोरूम दिल्ली) तक है।

4. मारुति सुजुकी वैगनआर बीएस 6
शुरुआती कीमत:
4.45 लाख रुपए
ARAI माइलेज: 21.79 kmpl

  • वैगनआर को भारत में पहली बार 1999 में लॉन्च किया गया था और तब से यह टॉल-बाय हैचबैक भारतीयों के बीच एक पसंदीदा फैमिली कार बनी हुई है।
  • नई वैगनआर दो पेट्रोल इंजन ऑप्शन में उपलब्ध है, जिसमें 1.0-लीटर और 1.2-लीटर इंजन शामिल है।
  • 1.0-लीटर पेट्रोल इंजन, 5500 आरपीएम पर 67 पीएस का पावर और 35 आरपीएम पर 90 एनएम का टार्क जनरेट करता है। इसे 5-स्पीड मैनुअल के साथ AMT गियरबॉक्स (मारुति के शब्दों में AGS) के साथ जोड़ा गया है।
  • 1.0-लीटर इंजन मैनुअल और एएमटी दोनों में 21.79 kmpl का माइलेज मिलता है, जो ARAI-प्रमाणित है। इसकी कीमत 4.45-5.44 लाख रुपए (एक्स-शोरूम दिल्ली) तक है।

5. मारुति सुजुकी एस-प्रेसो बीएस 6
शुरुआती कीमत:
3.70 लाख रुपए
ARAI माइलेज: 21.70 kmpl

  • मारुति सुजुकी ने रेनो क्विड को टक्कर देने के लिए भारत में एस-प्रेसो को लॉन्च किया है। इसके फंकी डिजाइन और रिफाइंड पावरट्रेन की बदौलत इसी जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला है।
  • यह बीएस 6-कंप्लेंट 999 सीसी, थ्री सिलेंडर पेट्रोल इंजन से लैस है। इसमें 5500 आरपीएम पर 67 पीएस का पावर और 3500 आरपीएम पर 90 एनएम का टार्क मिलता है।
  • इसमें 5-स्पीड मैनुअल के साथ-साथ एएमटी गियरबॉक्स का ऑप्शन भी मिल जाता है। इसमें फैक्ट्री फिटेड सीएनजी वैरिएंट का भी ऑप्शन मिल जाता है।
  • मैनुअल और एएमटी दोनों में ही 21.7 kmpl का माइलेज मिलता है। इसकी कीमत 3.70-4.99 लाख रुपए (एक्स-शोरूम दिल्ली) तक है।

6. मारुति सुजुकी सेलेरियो बीएस 6
शुरुआती कीमत:
4.41 लाख रुपए
ARAI माइलेज: 21.63 kmpl

  • मारुति सुजुकी सेलेरियो एक स्पेशियस फैमिली कार है। कंपनी जल्द ही इसका नेक्स्ट जनरेशन मॉडल उतारने की तैयारी में है।
  • यह पेट्रोल और सीएनजी वैरिएंट (बाई-फ्यूल) दोनों में भी उपलब्ध है। कुछ समय पहले ही इसका बीएस 6 एस-सीएनजी वैरिएंट लॉन्च किया है।
  • इसमें 998 सीसी, थ्री सिलेंडर पेट्रोल इंजन है, जो 6000 आरपीएम पर 67 पीएस का पावर और 3500 आरपीएम पर 90 एनएम का टार्क जनरेट करता है।
  • इसमें 5-स्पीड मैनुअल के साथ-साथ एएमटी गियरबॉक्स का ऑप्शन भी मिल जाता है।
  • दोनों में ही 21.63 kmpl का माइलेज मिलता है, जो ARAI-प्रमाणित है।। इसकी कीमत 4.41-5.58 लाख रुपए (एक्स-शोरूम दिल्ली) तक है।

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From Alto 800 to Renault Kwid, These Top 6 Most Fuel-efficient BS6 Cars in India Under Rs 5 Lakhs, Give Mileage Up to 22.05kmpl

सर्च में Google की दादागिरी के खिलाफ अमेरिका में केस; जानिए भारत में क्या असर पड़ेगा? October 21, 2020 at 02:27PM

अमेरिका में जस्टिस डिपार्टमेंट और 11 राज्यों ने सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले सर्च इंजिन Google पर मुकदमा दर्ज किया है। उस पर आरोप लगा है कि प्रतिस्पर्धा खत्म करने और अपना एकाधिकार जमाने के लिए उसने अवैध तरीके से ऐपल और स्मार्टफोन बनाने वाली कंपनियों से एक्सक्लूसिव डील्स की।

दो दशक में यह किसी टेक्नोलॉजी फर्म के खिलाफ सबसे बड़ा मुकदमा है। इससे पहले 1998 में इसी तरह का मुकदमा माइक्रोसॉफ्ट के खिलाफ भी दर्ज हुआ था। वैसे, Google पर यह आरोप पहले भी लगते रहे हैं। अब खबरें यह भी आ रही हैं कि ऑस्ट्रेलिया और जापान भी यूरोप और अमेरिका के साथ बड़ी टेक कंपनियों के एकाधिकार को चुनौती देने की तैयारी में है।

ऐसे में यह जानना जरूरी है कि इन मुकदमों में Google पर क्या आरोप लगे हैं? इसका क्या असर पड़ सकता है? आइए इन प्रश्नों के जवाब तलाशते हैं...

सबसे पहले, मुकदमा क्या है और किसने किया है?

  • अमेरिका में जस्टिस डिपार्टमेंट और 11 अलग-अलग राज्यों ने Google के खिलाफ यह एंटीट्रस्ट मुकदमा किया है। 54 पेज की शिकायत में आरोप लगाया गया है कि Google ने सर्च इंजिन बिजनेस में 90% से ज्यादा मार्केट हिस्सेदारी हासिल करने के लिए एक्सक्लूसिव डील्स की। इससे इन डिवाइस पर यूजर्स के लिए Google डिफॉल्ट सर्च इंजिन बन गया।
  • Google ने मोबाइल बनाने वाली कंपनियों, कैरियर्स और ब्राउजर्स को अपनी विज्ञापनों से होने वाली कमाई से अरबों डॉलर का पेमेंट किया ताकि Google उनके डिवाइस पर प्री-सेट सर्च इंजिन बन सके। इससे Google ने लाखों डिवाइस पर टॉप पोजिशन हासिल की और अन्य सर्च इंजिन के लिए खुद को स्थापित करने से रोक दिया।
  • आरोप यह भी है कि ऐपल और Google ने एक-दूसरे का सहारा लिया और अपने प्रतिस्पर्धियों को मुकाबले से बाहर कर दिया। अमेरिका में Google के सर्च ट्रैफिक में करीब आधा ऐपल के आईफोन्स से आया। वहीं, ऐपल के प्रॉफिट का पांचवां हिस्सा Google से आया।
  • Google ने इनोवेशन को रोक दिया। यूजर्स के लिए चॉइस खत्म की और प्राइवेसी डेटा जैसी सर्विस क्वालिटी को प्रभावित किया। Google ने अपनी पोजिशन का लाभ उठाया और अन्य कंपनियों या स्टार्टअप्स को उभरने या इनोवेशन करने का मौका ही नहीं छोड़ा। जस्टिस डिपार्टमेंट ने करीब एक साल की जांच के बाद यह मुकदमा दर्ज किया है।

अमेरिकी सरकार के आरोपों पर Google का क्या जवाब है?

##
  • Google के चीफ लीगल ऑफिसर केंट वॉकर का कहना है कि यह मुकदमा बेबुनियाद है। लोग Google का इस्तेमाल करते हैं क्योंकि उन्होंने ऐसा करने का फैसला किया है। Google ने किसी के साथ अपनी सर्विसेस का इस्तेमाल करने के लिए जबरदस्ती नहीं की है। यदि उन्हें चाहिए तो ऑप्शन मौजूद है।
  • उनका कहना है कि एंटी ट्रस्ट कानून के बहाने ऐसी कंपनियों के पक्ष लिया जा रहा है, जो मार्केट में कॉम्पीटिशन नहीं कर पा रही है। Google ऐपल और अन्य स्मार्टफोन कंपनियों को पेमेंट करता है ताकि उसे ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचने के लिए शेल्फ स्पेस मिल सके। इसमें कुछ भी गलत नहीं है।
  • वॉकर ने यह भी कहा कि अमेरिकी एंटी ट्रस्ट लॉ का डिजाइन ऐसा नहीं है कि किसी कमजोर प्रतिस्पर्धी को मजबूती प्रदान करें। यहां सबके लिए बराबर मौके हैं। यह मुकदमा कोर्ट में ज्यादा टिकने वाला नहीं है। Google जो भी सर्विस यूजर्स को देता है, वह मुफ्त है। इससे किसी और को नुकसान होने की आशंका जताना गलत है।

इस मुकदमे के पीछे की राजनीति क्या है?

  • इस मुकदमे को दर्ज करने की टाइमिंग से लेकर इसमें शामिल राज्यों तक कई प्रश्न खड़े हैं। चुनावों से ठीक दो हफ्ते पहले यह मुकदमा दाखिल किया गया है। आम तौर पर किसी भी कदम का चुनावों पर असर पड़ने का डर होता है, इस वजह से कोई बड़ा कदम सरकार नहीं उठाती।
  • महत्वपूर्ण बात यह है कि जिन 11 राज्यों ने जस्टिस डिपार्टमेंट का साथ दिया है, वह सभी रिपब्लिकन अटॉर्नी जनरल हैं। हकीकत तो यह है कि अमेरिका के सभी 50 राज्यों ने Google के खिलाफ एक साल पहले जांच शुरू की थी।

केस का नतीजा क्या आ सकता है?

  • इस तरह के केस में सुनवाई लंबी चलती है और फैसला आने में दो-तीन साल लग जाते हैं। माइक्रोसॉफ्ट के खिलाफ भी 1998 में इसी तरह का मुकदमा दर्ज हुआ था, जो सेटलमेंट पर खत्म हुआ था।
  • Google पर इससे पहले यूरोप में भी इसी तरह के आरोप लगे थे। यदि कंपनी की हार होती है तो उसे कंपनी के स्ट्रक्चर में कुछ बदलाव करने होंगे। वहीं, यदि वह जीत गई तो यह बड़ी टेक कंपनियों को मजबूती देगा। इससे उन पर काबू पाने की सरकारों की कोशिशों को झटका लगेगा।
  • यह तो तय है कि मुकदमे का नतीजा आने में समय लगेगा। तीन नवंबर को अमेरिका में चुनाव है और नई सरकार को ही यह केस लड़ना होगा। डेमोक्रेट्स लंबे समय से दलील दे रहे हैं कि नए डिजिटल युग में एंटी ट्रस्ट कानून के प्रावधानों को बदलने की जरूरत है।

क्या भारत में भी Google के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है?

  • भारत में कॉम्पीटिशन कमीशन ऑफ इंडिया (सीसीआई) का काम बाजार में किसी कंपनी के एकाधिकार को खत्म करना है। वह हेल्दी कम्पीटिशन को प्रमोट करता है। अमेरिका में जो मुकदमा दाखिल हुआ है, उसी तरह की शिकायत की जांच सीसीआई पहले ही कर रहा है।
  • पिछले महीने Google बनाम पेटीएम के मुद्दे पर भी ऐसी ही स्थिति बनी थी, जब Google ने अपनी पोजिशन का फायदा उठाते हुए पेटीएम के ऐप को प्ले स्टोर से हटा दिया था। तब भी पेटीएम ने यही आरोप लगाए थे कि Google अपने और दूसरे ऐप्स के बीच भेदभाव करता है।
  • न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने कुछ दिन पहले खबर दी थी कि कॉम्पीटिशन कमीशन ऑफ इंडिया ने स्मार्ट टीवी मार्केट में Google की दादागिरी की जांच करने वाली है। मामला स्मार्ट टीवी में इंस्टॉल होने वाले एंड्रॉयड ओएस के सप्लाई से जुड़ा है, जो भारत में बिक रहे ज्यादातर स्मार्ट टीवी में पहले से इंस्टॉल मिलता है।

भारत के कानून एक्सपर्ट क्या कह रहे हैं?

  • साइबर कानून विशेषज्ञ और सुप्रीम कोर्ट के वकील विराग गुप्ता कहते हैं कि यदि अमेरिका में Google के कॉर्पोरेट वर्चस्व को खत्म करने की कार्रवाई हुई तो इसका असर भारत में भी पड़ेगा। अमेरिका के मुकाबले भारत में Google जैसी कंपनियों ने अपना अराजक वर्चस्व स्थापित किया है।
  • सीनियर एडवोकेट के मुताबिक, भारत में नए कानून बनाने और पुराने कानूनों में बदलाव जरूरी है। भारत ने हाल में चीन और पाकिस्तान से एफडीआई को लेकर कई प्रतिबंधात्मक नियम बनाए हैं। इसी तर्ज पर टेक कंपनियों के लिए भी कंपनी कानून, आईटी कानून और आयकर कानून के नियमों को बदलना जरूरी है।
  • गुप्ता कहते हैं कि इन कंपनियों की ओर से बड़े पैमाने पर डेटा की खरीद-फरोख्त होती है। इस पर अंकुश लगाना जरूरी है, ताकि सरकारी राजस्व बढ़ाया जा सके। भारत में इन कंपनियों के एकाधिकार को चुनौती देने के लिए कम्पीटिशन कमिशन की व्यवस्था को दुरूस्त करने की जरूरत है।


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